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ईरान-इजरायल वॉर (क्रेडिट, एएपपी)
Ayatollah Khamenei death 2026: अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर 28 फरवरी 2026 को बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए थे जिन्हें मीडिया में 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' नाम दिया गया है. इन हमलों की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई.
ईरानी राज्य मीडिया ने इसकी पुष्टि की है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोशल मीडिया पर इसे इतिहास की सबसे बुरी शख्सियतों में से एक की मौत बताते हुए जश्न मनाया है. बता दें खामेनेई जो 1989 से ईरान की सत्ता के सबसे ऊपर थे. अब 86 साल की उम्र में एक प्रिसिजन स्ट्राइक में मारे गए हैं. उनके साथ कई अन्य सीनियर कमांडर और अधिकारियों की भी इस हमले में मारे जाने की खबर है.
PRESIDENT TRUMP ON IRAN: pic.twitter.com/sfdN8EWgJc
— The White House (@WhiteHouse) March 2, 2026
तेहरान में हो रहे ये दो काम एक साथ, कौन होगा ईरान का अगला सुप्रीम लीडर
जानकारी के अनुसार अपने सुप्रीम लीडर की मौत के बाद ईरान ने 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है. लेकिन इस ईरान की सड़कों से मिलीजुली तस्वीरें आ रही हैं. एक तरफ जहां सरकार के समर्थक 'डेथ टू अमेरिका' के नारे लगा रहे हैं तो दूसरी तरफ कुछ इलाकों में लोग खामेनेई की मौत पर खुशी मना रहे हैं. तेहरान और अन्य शहरों में विरोध प्रदर्शन और सरकारी रैलियां दोनों एक साथ चल रही हैं.
खामेनेई के जाने के बाद ईरान में रेजीम चेंज होगा या नहीं?
अब सवाल यह है कि खामेनेई के जाने के बाद ईरान में रेजीम चेंज होगा या नहीं? ईरान का संविधान कहता है कि सुप्रीम लीडर की मौत पर एक्सपर्ट्स की असेंबली नया लीडर चुनती है, लेकिन युद्ध के बीच यह प्रक्रिया कितनी आसान होगी? अभी तक एक इंटरिम लीडरशिप काउंसिल बनाई गई है जिसमें प्रेसिडेंट मसूद पेजेशकियन, ज्यूडिशियरी चीफ गोलाम-हुसैन मोहसिनी-एजे'ई और अली रजा आरफी जैसे नाम शामिल हैं.
President Trump will not get the United States into a years-long conflict with no clear objective.
— JD Vance (@JDVance) March 3, 2026
Iran can never be allowed to obtain a nuclear weapon. That is the goal of this operation and President Trump will see it through to completion. pic.twitter.com/Spi2Mcke6F
ईरान की असली ताकत इन लड़ाकू के हाथों में
बता दें यह काउंसिल अस्थायी तौर पर सत्ता संभाल रही है लेकिन कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि असली ताकत इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के हाथों में है. IRGC ने हमलों के बावजूद अपनी पकड़ बनाए रखी है और नए लीडर के तौर पर हार्डलाइनर या IRGC से जुड़े व्यक्ति के आने की ज्यादा संभावना है.
अब भी बड़े पैमाने पर विद्रोह की कोई साफ तस्वीर नहीं है
हाल ही में दिए बयान में ट्रंप और इजराइल के पीएम नेतन्याहू ने खुलकर कहा है कि उनका मकसद रेजीम चेंज है. ट्रंप ने ईरानी लोगों से अपील की कि वे सड़कों पर उतरें और सरकार को गिराएं. लेकिन बता दें कि यहां रियलिटी अलग है. इंटरनेशनल मीडिया रिपोर्टृस के अनुसार ईरान की सिस्टम 1979 की इस्लामिक रेवोल्यूशन से बनी हुई है. इसमें धार्मिक नेटवर्क, IRGC की आर्थिक और मिलिट्री ताकत, और मजबूत कंट्रोल सिस्टम है.
One key objective of Operation Epic Fury: ensuring Iran can NEVER obtain a nuclear weapon. pic.twitter.com/NKaBaTYzFP
— The White House (@WhiteHouse) March 2, 2026
शॉर्ट टर्म में रेजीम चेंज मुश्किल है
पिछले सालों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं लेकिन वे दबा दिए गए. अब भी बड़े पैमाने पर विद्रोह की कोई साफ तस्वीर नहीं है. कई एनालिस्ट्स कह रहे हैं कि शॉर्ट टर्म में रेजीम चेंज मुश्किल है. IRGC मजबूत है और हमले से लोगों में राष्ट्रवादी भावना भी बढ़ सकती है.
क्या लोग सत्ता बदल देंगे, या सिस्टम और सख्त हो जाएगा? ये तो आने वाले दिन ही बताएंगे
खामेनेई की मौत ईरान के लिए एक बड़ा झटका है लेकिन यह जरूरी नहीं कि रेजीम का अंत हो. IRGC और क्लेरिकल नेटवर्क अभी भी मजबूत हैं और नया लीडर आने पर पॉलिसी में ज्यादा बदलाव नहीं आ सकता. युद्ध कितने दिन चलेगा यह देखने वाली बात होगी ट्रंप ने कहा है कि ऑपरेशन कुछ हफ्तों में खत्म हो सकता है लेकिन मिडिल ईस्ट की जटिलता को देखते हुए यह लंबा हो सकता है. ईरान का भविष्य अनिश्चित है क्या लोग सत्ता बदल देंगे, या सिस्टम और सख्त हो जाएगा? ये तो आने वाले दिन ही बताएंगे.
अभी तक हुए युद्ध के क्या पड़े प्रभाव
- ईरान ने जवाबी हमले किए हैं, इजराइल, अमेरिकी बेस और गल्फ देशों पर मिसाइल और ड्रोन अटैक किए हैं.
- हिजबुल्लाह और अन्य प्रॉक्सी ग्रुप्स भी शामिल हो गए हैं, जिससे लेबनान तक जंग फैल गई है.
- होर्मुज स्ट्रेट पर खतरा बढ़ा है, जिससे ऑयल प्राइस में उछाल आ सकता है और ग्लोबल इकोनॉमी प्रभावित हो सकती है.
- अमेरिका ने चेतावनी दी है कि ईरान और उसके प्रॉक्सी अमेरिकी टारगेट्स पर हमला कर सकते हैं, लेकिन बड़े अटैक की संभावना कम है.
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