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Explainer: शेयर बाजार ने मचाया धमाल, किया ऐसा कारनामा कि अमेरिका-चीन-जापान रह गए हैरान! क्या फायदे?

देश के शेयर बाजार ने 5 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को छूकर धमाल मचा दिया. इतिहास में ये पहला मौका है जब बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड सभी कंपनियों की मार्केट वैल्यू पांच ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गई है.

Updated on: 22 May 2024, 02:45 PM

New Delhi:

Indian Markets Hit 5 trillion-dollar M-Cap: जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव 2024 आगे बढ़ रहा है. वैसे भारतीय बाजार का जोश हाई है. देश के शेयर बाजार ने 5 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को छूकर धमाल मचा दिया. इतिहास में ये पहला मौका है जब बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड सभी कंपनियों की मार्केट वैल्यू पांच ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गई है. यह एक ऐतिहासिक कारनामा है, जिसने अमेरिका, चीन और जापन को हैरान कर दिया. बाजार के इस नए मुकाम से देश को क्या फायदे होंगे. आइए जानते हैं.

मंगलवार के कारोबारी दिन में शेयर मार्केट में सुस्ती रही. इसके बावजूद बीएसई मार्केट कैप कीर्तिमान बनाते हुए 5 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को छू गया. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की वेबसाइट के अनुसार, बीएसई में लिस्टेड सभी कंपनियों का मार्केट कैप 5 लाख करोड़ डॉलर यानी 416 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया. इस तरह अमेरिका, चीन, जापान और हॉन्गकॉन्ग के बाद ऐसा करने वाला भारत दुनिया का पांचवां देश बन गया.

दुनिया भर में सिर्फ चार स्टॉक मार्केटों का मार्केट कैप 5 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा है. मार्केट कैप के मामले में इंडियन स्टॉक मार्केट के आगे सिर्फ चार देश हैं. पहले नंबर पर अमेरिका का शेयर मार्केट है, दूसरे नंबर पर चीन, तीसरे नंबर पर जापान और चौथे नंबर पर हॉन्ग कॉन्ग का मार्केट कैप है. इन देशों के मार्केट कैप को नीचे दी गई सूची में आप देख सकते हैं.

गौरतलब है कि 21 मई 2024 यानी मंगलवार को भारतीय बाजार सेंसेक्स 52 अंक गिरकर 73,953 पर जबकि निफ्टी 27 अंक की मामूली बढ़त के साथ 22, 529 के लेवल पर बंद हुआ.

क्या होता है मार्केट कैप?

मार्केट कैपिटलाइजेशन, जिसे शॉर्ट में मार्केट कैप कहते हैं. यह किसी भी कपंनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर, जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं. उनकी वैल्यू है. इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की टोटस नंबर को स्टॉक के प्राइस से गुणा करके किया जाता है. मार्केट कैप का इस्तेमाल कंपनी के शेयरों को कैटेगराइज करने के लिए किया जाता है. मार्केट कैप के फॉर्मूले से साफ है कि कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को स्टॉक की कीमत से गुणा करके इसे निकाला जाता है. शेयर का भाव बढ़ेगा तो उस कंपनी का मार्केट कैप भी बढ़ेगा. वहीं, अगर शेयर का भाव घटेगा तो कंपनी का मार्केट कैप भी घटेगा.

बीएसई के मार्केट कैप का सफर

बीएसई के मार्केट कैप 5 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचने का सफर लंबा रहा है. हालांकि 6 महीने में ही इसमें एक ट्रिलियन (एक लाख करोड़ डॉलर) का इजाफा हुआ है. इस तरह इंडियन स्टॉक मार्केट ने ये मुकाम हासिल किया. 29 नवंबर 2023 को बीएसई मार्केट कैप 4 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंचा था. 6 महीनों के बाद अब यह एक ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी के साथ 5 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को छू गया. बता दें कि बीएसई का मार्केट कैपिटलाइजेशन 28 मई 2007 को पहली बार 1 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंचा था. 2017 में इसका आकार 2 ट्रिलियन डॉलर हो पाया था. 2021 में इसने 3 ट्रिलियन और 2023 में 4 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा छुआ, लेकिन अब छह महीने से कम समय में ही ये 4 ट्रिलियन से 5 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंच गया.

BSE का M-Cap 5 ट्रिलियन, क्या फायदा?

किसी कंपनी के शेयर में मुनाफा मिलेगा या नहीं वैसे तो इसका अनुमान कई फैक्टर्स को देखकर लगाया जाता है. लेकिन इनमें एक फैक्टर मार्केट कैप भी होता है. निवेशक मार्केट कैप को देखकर पता लगा सकते हैं कि कंपनी कितनी बड़ी है. कंपनी का मार्केट जितना ज्यादा होता है उसमें निवेश करना उतना ही सुरक्षित माना जाता है. मार्केट कैप का 5 लाख करोड़ के आंकड़े को छूना यह दर्शाता है कि बीएसई में लिस्टेड ज्यादातर कंपनियों की परफॉर्मेंस अच्छी है.

भारतीय बाजार ने यह उपलब्धि ऐसे समय में हासिल की है जब देश में लोकसभा चुनाव चल रहे हैं, जिसके चलते विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) वो भारत के मार्केट से अपना पैसा निकाल रहे हैं. वहीं लोकसभा चुनाव के नतीजों को लेकर अनिश्चतता और चीन के बाजारों में आकर्षक वैल्यूशन के चलते विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भी भारतीय बाजार से अपना पैसा निकाल रहे हैं. अब बीएसई मार्केट कैप का रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचना शेयर मार्केट में देसी और विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाएगा. इससे देश की अर्थव्यवस्था में मजबूती आएगी.

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