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What are the IMEC and I2U2: भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई हालिया बैठक ने भारत-इजरायल संबंधों को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है. इस मुलाकात को ऐतिहासिक बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि दोनों देशों ने अपने संबंधों को अब ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का दर्जा दे दिया है. उन्होंने कहा कि यह निर्णय दोनों देशों के नागरिकों की आकांक्षाओं और साझा भविष्य की दिशा को दर्शाता है.
आतंकवाद के खिलाफ साझा संकल्प
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति दोहराई. वैश्विक मंचों पर एक-दूसरे का समर्थन करने और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी. खुफिया जानकारी साझा करने, रक्षा तकनीक और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई गई. यह कदम ऐसे समय में अहम माना जा रहा है जब वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चुनौतियां बढ़ रही हैं.
फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक इजरायल यात्रा ने वैश्विक राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है. इस यात्रा का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु IMEC और I2U2 जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स रहे हैं, जिन्हें भारत और इजरायल मिलकर एक नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी में हैं. आइए जानते हैं कि आखिर IMEC और I2U2 है क्या है जिस पर भारत और इजरायल दोनों फोकस कर रहे हैं.
1. IMEC: भारत को यूरोप से जोड़ने वाला 'आधुनिक सिल्क रोड'
IMEC (India-Middle East-Europe Economic Corridor) का उद्देश्य भारत को अरब देशों के रास्ते यूरोप से जोड़ना है.
कैसे काम करेगा?
यह गलियारा भारत के बंदरगाहों को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से समुद्र के रास्ते जोड़ेगा, फिर वहां से सऊदी अरब और जॉर्डन होते हुए रेल नेटवर्क इजरायल के हाइफा पोर्ट (Haifa Port) तक जाएगा. अंत में हाइफा से समुद्री मार्ग द्वारा माल यूरोप पहुंचेगा.
इजरायल की भूमिका: इजरायल का हाइफा बंदरगाह (जिसका प्रबंधन भारतीय कंपनी अडानी ग्रुप के पास है) इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे अहम गेटवे है.
महत्व: यह चीन के 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) का एक मजबूत विकल्प माना जा रहा है, जो व्यापार के समय को 40% तक कम कर देगा.
2. I2U2: पश्चिम एशिया का 'क्वाड'
I2U2 चार देशों भारत (India), इजरायल (Israel), यूएई (UAE) और अमेरिका (USA) का एक समूह है.
फोकस एरिया: यह समूह जल, ऊर्जा, परिवहन, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा जैसे 6 क्षेत्रों पर केंद्रित है.
भारत-इजरायल का सहयोग
इस फ्रेमवर्क के तहत इजरायल की आधुनिक तकनीक और भारत के विशाल बाजार व कृषि क्षमता का उपयोग कर 'फूड कॉरिडोर' बनाने की योजना है. इसमें यूएई भारत में 'इंटीग्रेटेड फूड पार्क्स' के लिए निवेश कर रहा है, जिसमें इजरायली तकनीक का इस्तेमाल होगा.
क्यों है यह साझेदारी महत्वपूर्ण?
भारत और इजरायल के बीच बढ़ता यह तालमेल केवल व्यापार तक सीमित नहीं है. विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में बदली हुई वैश्विक परिस्थितियों में भारत खुद को एक 'विश्व-मित्र' और ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में देख रहा है.
भविष्य की ओर कदम
यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर भी बातचीत तेज हुई है. यदि यह समझौता होता है, तो भारतीय आईटी कंपनियों और इजरायली हाई-टेक स्टार्टअप्स के लिए संभावनाओं के नए द्वार खुलेंगे.
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