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Explainer: अमेरिका खुद को लोकतंत्र का पैरोकार बताता है, लेकिन इतिहास के पन्ने पलटें तो उसकी विदेश नीति का एक सख्त और विवादित चेहरा भी सामने आता है. शीत युद्ध से लेकर अब तक अमेरिका पर कई देशों में सरकारें गिराने या फिर तख्तापलट करवाने या फिर सत्ता परिवर्तन को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं. हालांकि सवाल यह है कि वास्तव में अमेरिका कितने देशों में ऐसा कर चुका है और इसके पीछे क्या तर्क दिए गए?
अमेरिका समय-समय पर उन देशों के खिलाफ हथियार उठाए जहां लोगों यानी आम जनता त्रस्त हुई. लोगों के लिए उस देश में रहना मुश्किल हुआ या फिर ऐसे देश जहां लोकतंत्र पूरी तरह खत्म हो गया. ये तर्क भी अमेरिका ने ही दिए और इन्हीं तर्कों के आधार पर उसने तख्तापलट को अंजाम भी दिया. अमेरिकी राष्ट्रपति की कुर्सी पर भी कोई भी बैठा हो उसने अपने देश को दुनिया का सुपर पावर बताया औऱ इस सुपर पावर का इस्तेमाल दुनिया को बचाने के लिए किया. आइए जानते हैं ऐसे कौन-कौन से देश हैं जहां अमेरिका ने सरकार गिराने में अहम भूमिका निभाई. ताजा उदाहरण वेनेजुएला है जहां के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो अब भी अमेरिका की कैद में हैं.
कोई एक संख्या क्यों नहीं है?
सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि 'सरकार गिराना' हमेशा एक जैसा नहीं होता. कभी यह सीधा सैन्य हस्तक्षेप होता है, कभी खुफिया एजेंसियों के जरिए तख्तापलट और कभी आर्थिक प्रतिबंध, राजनीतिक दबाव या विपक्ष को समर्थन.
इसी वजह से इतिहासकारों और शोध संस्थानों के आंकड़े अलग-अलग हैं. लेकिन अधिकांश गंभीर अध्ययनों में यह माना जाता है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने सीधे या परोक्ष रूप से 30 से 50 से अधिक देशों में सत्ता परिवर्तन में भूमिका निभाई है.
शीत युद्ध: हस्तक्षेप की शुरुआत
1945 के बाद अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध शुरू हुआ. अमेरिका का तर्क था कि वह 'कम्युनिज़्म को रोकने' के लिए दखल दे रहा है.
जैसे:
- ईरान (1953): चुनी हुई सरकार गिराकर शाह को सत्ता में लाने में भूमिका
- ग्वाटेमाला (1954): वामपंथी सरकार का तख्तापलट
- कांगो (1960): नेता पैट्रिस लुमुम्बा को हटाने में भूमिका
- चिली (1973): सल्वाडोर अयेंदे की सरकार का अंत
इन मामलों में अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA की भूमिका पर अब तक बहस होती है.
लैटिन अमेरिका बना सबसे बड़ा मैदान
लैटिन अमेरिका, अमेरिका के हस्तक्षेप का सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है. यहां क्यूबा, निकारागुआ, पनामा, अल सल्वाडोर, होंडुरास और वेनेजुएला जैसे देश शामिल हैं.
- पनामा (1989): सीधे सैन्य हमले से सरकार बदली गई
- वेनेजुएला: ह्यूगो शावेज और बाद में मादुरो के खिलाफ तख्तापलट और प्रतिबंधों के आरोप
वेनेजुएला में अमेरिका ने खुले तौर पर विपक्षी नेता को 'कार्यवाहक राष्ट्रपति' के रूप में मान्यता दी, जिसे कई देश राजनीतिक हस्तक्षेप मानते हैं.
मध्य पूर्व और एशिया में भूमिका
- इराक (2003): हथियारों के बहाने सैन्य हमला, सद्दाम हुसैन की सरकार का अंत
- अफगानिस्तान (2001): तालिबान शासन गिराया गया
- सीरिया: विपक्षी गुटों को समर्थन देने के आरोप
- लीबिया (2011): नाटो हस्तक्षेप के बाद गद्दाफी शासन का पतन
इन हस्तक्षेपों का नतीजा कई बार लंबे समय तक अस्थिरता के रूप में सामने आया.
सरकार गिराने या तख्ता पलट पर अमेरिका क्या तर्क देता है?
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अमेरिका आमतौर पर तीन तर्क देता रहा है:
1. लोकतंत्र की रक्षा
यानी अमेरिका जब भी किसी देश में सरकार गिराई या हस्तक्षेप किया तो उसके पीछे बड़ी वजह लोकतंत्र की रक्षा रही.
2. मानवाधिकार
वहीं लोगों के अधिकारों के हनन का अंत करने के लिए भी अमेरिका ने प्रमुख रूप से हथियार उठाए और दूसरे देश में तख्तापलट कर डाला.
3. राष्ट्रीय सुरक्षा
इसके अलावा तीसरा और अहम कारण जो अमेरिका बताता है वह है राष्ट्रीय सुरक्षा. इसका हवाला देकर भी अमेरिका ने कई देशों में सरकार गिराने का काम किया है.
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क्या कहते हैं अमेरिका के आलोचक
वहीं अमेरिका भले ही सरकार गिराने के पीछे लोकतंत्र की रक्षा, मानवाधिकार या फिर राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अहम और ठोस कारण देता हो, लेकिन आलोचकों की मानें तो अमेरिका के तख्तापलट के पीछे की वजह कुछ और ही होती है. आलोचकों की मानें तो अमेरिका के हथियार उठाने की वजह तेल, संसाधन, रणनीतिक नियंत्रण और वैश्विक प्रभाव असली कारण रहे हैं. आलोचकों का मानना है कि युनाइटेड स्टेट ने हमेशा इन्हीं कारणों के चलते दूसरे देशों पर नजरें रखीं और फिर मौका मिलते ही सरकारें गिराईं.
लोकतंत्र एक सिद्धांत है या सिर्फ एक रणनीति
स्पष्ट संख्या बताना मुश्किल है, लेकिन इतना तय है कि अमेरिका आधुनिक इतिहास में सबसे ज़्यादा विदेशी हस्तक्षेप करने वाले देशों में शामिल रहा है. कहीं वह सीधे युद्ध के ज़रिए सत्ता बदलता है, तो कहीं परदे के पीछे रहकर.
वेनेजुएला जैसे मौजूदा मामलों ने यह बहस फिर तेज कर दी है कि क्या वैश्विक राजनीति में 'लोकतंत्र' एक सिद्धांत है या सिर्फ एक रणनीति.
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