Bangladesh Election 2026: BNP की तूफानी वापसी, जमात की उम्मीदें चूर; जानिए बांग्लादेश की नई सियासत का पूरा 'खेल'

Bangladesh Election 2026: बांग्लोदश में 2024 का छात्र आंदोलन सरकारी नौकरियों में कोटा सिस्टम की बहाली के खिलाफ शुरू हुआ था. चुनाव नतीजों में BNP ने 209 से 212 सीटें हासिल कीं हैं.

Bangladesh Election 2026: बांग्लोदश में 2024 का छात्र आंदोलन सरकारी नौकरियों में कोटा सिस्टम की बहाली के खिलाफ शुरू हुआ था. चुनाव नतीजों में BNP ने 209 से 212 सीटें हासिल कीं हैं.

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Amit Kasana
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तारिक रहमान प्रचार के दौरान (File Photo)

Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश की राजनीति में आज 12 फरवरी 2026 को एक नया अध्याय शुरू हो चुका है. यहां संसदीय चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने शानदार जीत दर्ज की है. बीएनपी 17 सालों के बाद देश में सत्ता में वापसी कर रही है.बांग्लादेश के यह चुनाव 2024 के छात्र आंदोलन के बाद पहला बड़ा जनादेश है, जिसने शेख हसीना की सरकार को उखाड़ फेंका था. हालांकि जमात-ए-इस्लामी जैसी पार्टियां जो आंदोलन को समर्थन देती रहीं चुनावी मैदान में ज्यादा चमत्कार नहीं दिखा सकीं. आइए, इस पूरे परिदृश्य को समझते हैं कि बांग्लादेश में नतीजों के बाद वर्तमान हालात क्या हैं और देश में भविष्य की राजनीति किस दिशा में जा सकती है?

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क्या था 2024 का छात्र आंदोलन?

जानकारी के मुताबिक बांग्लोदश में 2024 का छात्र आंदोलन सरकारी नौकरियों में कोटा सिस्टम की बहाली के खिलाफ शुरू हुआ था. दरअसल, जून 2024 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने 30% कोटा स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों के लिए लागू कर दिया जिससे युवाओं में गुस्सा भड़का​ फिर वह सड़कों पर उतर गए. मीडिया​ रिपोर्ट्स के अनुसार यह सिर्फ कोटा का मुद्दा नहीं था. बांग्लादेश में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और हसीना सरकार की सत्तावादी नीतियों ने प्रदर्शन की इस आग में घी डालने का काम किया. छात्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए लेकिन पुलिस की गोलीबारी और इंटरनेट ब्लैकआउट ने इसे जन-क्रांति में बदल दिया. जिसका नतीजा ये रहा कि अगस्त तक तत्तकालीन पीएम शेख हसीना को इस्तीफा देकर देश छोड़ना पड़ा.

चुनावों के पीछे अहम रही जमात-ए-इस्लामी की भूमिका

आंदोलन के दौरान जमात-ए-इस्लामी की भूमिका अहम थी. इस इस्लामी पार्टी ने आंदोलन को समर्थन दिया अपनी छात्र विंग इस्लामी छत्र शिबिर के जरिए कैंपस पर सक्रिय रही और प्रदर्शनकारियों की मदद की. जानकार बताते हैं कि इस दौरान लीडरशिप मुख्य रूप से सेकुलर छात्रों के हाथ में थी जो बाद में नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) बनाकर उभरे. हालांकि बाद में जमात को आंदोलन में शामिल होने के लिए सरकार ने बैन भी किया लेकिन पोस्ट-उप्राइजिंग में यह पार्टी री-ओर्गनाइज हुई और NCP के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ी. फिर भी जमात की उम्मीदें पूरी नहीं हुईं यह आंदोलन का फायदा उठाने में कामयाब रही लेकिन चुनावी नतीजों में BNP के सामने फीकी पड़ गई.

चुनाव नतीजे आए सामने, कैसे BNP को मिली प्रचंड जीत? 

300 सीटों वाली जातीय संसद में BNP और उसके गठबंधन ने 209 से 212 सीटें हासिल कीं जो दो-तिहाई बहुमत है. इससे पार्टी को संविधान संशोधन जैसी बड़ी शक्तियां मिलेंगी. तारिक रहमान खालिदा जिया के बेटे हैं और BNP के चेयरमैन हैं वह अगले प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं. बता दें यह 2009 के बाद BNP की पहली सत्ता वापसी है जो 2024 की अस्थिरता के बाद स्थिरता का संकेत दे रही है.

किसने​ किया 'सकारात्मक विपक्ष' का वादा  

इस चुनाव में जमात-ए-इस्लामी और उसके गठबंधन ने 60 से 70 सीटें जीतीं हैं जो ​अब मुख्य विपक्ष की भूमिका निभाएगीं. नतीजों में मिली हार के बाद पार्टी प्रमुख शफीकुर रहमान ने हार स्वीकार की है और बयान जारी कर जनता से 'सकारात्मक विपक्ष' का वादा किया है. हालांकि जमात की इस्लामी कानून आधारित नीतियां युवाओं को आकर्षित करने में कामयाब रहीं लेकिन BNP की व्यापक अपील के आगे ये नहीं टिक सकीं. अन्य छोटी पार्टियां और निर्दलीयों को बाकी सीटें मिलीं हैं. चुनाव शांतिपूर्ण रहे वहीं, वोटर टर्नआउट की बात करें तो ये 60% से ऊपर अनुमानित किया गया है.

बांग्लादेश में आगे क्या होगा और आज के हालात क्या हैं

चुनाव के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक शांति लौट रही है. अंतरिम सरकार ने चुनाव कराया जो 2024 की हिंसा (1400+ मौतें) के बाद राहत भरा है. लेकिन अभी बांग्लादेश में आर्थिक चुनौतियां बरकरार हैं, यहां महंगाई, बेरोजगारी और विदेशी निवेश की कमी है. चुनाव के बाद भारत, अमेरिका और चीन ने BNP को जीत पर बधाई दी है विदेश नीति के जानकारों का कहना है कि अब बांग्लादेश में नए निजाम के बाद क्षेत्रीय संबंधों पर नजर रहेगी खासकर भारत के साथ सीमा और रोहिंग्या मुद्दे पर नई सरकार का क्या स्टैंड होता है ये देखने वाली बात होगी.

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