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america venezuela conflict
Explainer: अमेरिका की सेना द्वारा वेनेजुएला पर किए गए हमलों ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है. यहां राजधानी कराकस में शनिवार तड़के हुए धमाकों और अमेरिकी दावों के बाद यह मामला सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहा. लैटिन अमेरिका में बढ़ते इस संकट का असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है, जिनके वेनेजुएला से लंबे समय से रिश्ते रहे हैं.
कैसे रहे हैं दोनों देशों के बीच संबंध
भारत और वेनेजुएला के बीच राजनयिक संबंध साल 1959 से हैं. इन रिश्तों की सबसे मजबूत कड़ी ऊर्जा और तेल सहयोग रहा है. वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में गिना जाता है. भारत लंबे समय तक वहां से कच्चा तेल आयात करता रहा है. भारत की सरकारी कंपनी ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ONGC Videsh) ने भी वेनेजुएला के तेल क्षेत्रों में निवेश किया है, खासकर भारी तेल परियोजनाओं में. हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते बीते कुछ सालों में भारत ने तेल आयात काफी कम कर दिया, लेकिन संबंध पूरी तरह खत्म नहीं हुए.
क्या पड़ेगा प्रभाव
अगर अमेरिका और वेनेजुएला के बीच टकराव लंबा चलता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ेगा. वेनेजुएला का तेल सस्ता और भारी माना जाता है. युद्ध या अस्थिरता के कारण अगर वहां तेल उत्पादन प्रभावित होता है, तो अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें बढ़ सकती हैं. इसका असर भारत के आयात बिल पर पड़ेगा, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है. ऐसे में भारत को मध्य-पूर्व, रूस और अफ्रीकी देशों पर और ज्यादा निर्भर होना पड़ सकता है.
व्यापार के मोर्चे पर नुकसान
व्यापार के मोर्चे पर भी भारत को नुकसान झेलना पड़ सकता है. भारत और वेनेजुएला के बीच फार्मा उत्पाद, चावल, कृषि और कुछ इंजीनियरिंग सामानों का व्यापार होता रहा है. पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण यह व्यापार सीमित है. अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो भुगतान प्रणाली और बैंकिंग चैनल और जटिल हो जाएंगे, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए जोखिम बढ़ेगा.
भारत का क्या रहेगा रुख
विदेश नीति के स्तर पर भारत संतुलन की राह पर चलता नजर आएगा. भारत आमतौर पर किसी भी देश की संप्रभुता के समर्थन में खड़ा रहता है और बाहरी सैन्य हस्तक्षेप का विरोध करता है. ऐसे मामलों में भारत बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता देता है. अमेरिका-वेनेजुएला विवाद में भी भारत सैन्य कार्रवाई के बजाय शांतिपूर्ण समाधान की अपील करेगा. साथ ही भारत अपने राष्ट्रीय हितों जैसे तेल, निवेश और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर खास नजर रखेगा.
वेनेजुएला में कितने इंडियन
वेनेजुएला में करीब 3 हजार से 5 हजार भारतीय और भारतीय मूल के लोग रहते हैं. इनमें ज्यादातर लोग व्यापार, होटल-रेस्टोरेंट, फार्मा और छोटे उद्योगों से जुड़े हैं. फिलहाल कोई बड़ी आपात स्थिति सामने नहीं आई है, लेकिन अगर संघर्ष लंबा चलता है, तो भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भारत सरकार के लिए बड़ा मुद्दा बन सकती है. जरूरत पड़ने पर भारत पहले की तरह सीमित स्तर पर निकासी योजना पर भी विचार कर सकता है.
विदेश नीति पर दिख सकता है असर
कुल मिलाकर, अमेरिका-वेनेजुएला संकट भारत के लिए इसलिए अहम है क्योंकि इससे ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश और विदेश नीति पर असर पड़ सकता है. भारत इस पूरे घटनाक्रम में संयम, संतुलन और कूटनीति की राह पर चलते हुए वैश्विक स्थिरता की बात करता नजर आएगा.
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