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अमेरिका के मियामी हवाई अड्डे पर जासूसी कुत्ते सूंघ कर पता लगा रहे कोरोना

कोबरा और वन बेट्टा अपनी-अपनी शिफ्ट में चेकपॉइंट से गुजरने वाले कर्मचारियों के चेहरे को सूंघते हैं जिससे कर्मचारियों के पसीने, सांस और गंध में वायरस की उपस्थिति का पता लगाया जा सके.

News Nation Bureau | Edited By : Pradeep Singh | Updated on: 12 Sep 2021, 09:54:46 PM
sniffing dogs

sniffing dogs (Photo Credit: News Nation)

नई दिल्ली:

दुनिया भर में कोरोना वायरस का संक्रमण और डर अभी खत्म नहीं हुआ है. कोरोना वायरस संक्रमण की जांच और सर्वमान्य उपचार अभी तक सामने नहीं आयी है, लेकिन अमेरिका के  मियामी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के कर्मचारी जो हथियारों और अन्य निषिद्ध वस्तुओं के लिए मानक सुरक्षा जांच से गुजरते हैं, उनको अब काम शुरू करने से पहले एक और स्क्रीनिंग से गुजरना पड़ रहा है. यह स्क्रीनिंग कोई मशीन नहीं बल्कि जासूसी कुत्ते कोबरा और वन बेट्टा सूंघ कर परीक्षण कर रहे हैं.मियामी एयरपोर्ट पर दो प्रशिक्षित कुत्ते कर्मचारियों का कोरोना संक्रमण पता लगाने के लिए लगाये गये हैं.

दरअसल, बेल्जियम नस्ल का मादा डॉग कोबरा और डच शेफर्ड नस्ल का वन बेट्टा, 7 वर्षीय कुत्ते हैं जिन्हें कोरोनावायरस की उपस्थिति का पता लगाने के लिए प्रशिक्षित किया गया है. अमेरिका के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक, मियामी इंटरनेशनल में उत्सुक-नाक वाले कुत्ते एक पायलट कार्यक्रम का हिस्सा हैं-और कोरोनोवायरस के खिलाफ लड़ाई में नियुक्त करने वाले पहले जासूसी कुत्ते हैं. 

कोबरा और वन बेट्टा अपनी-अपनी शिफ्ट में चेकपॉइंट से गुजरने वाले कर्मचारियों के चेहरे को सूंघते हैं जिससे कर्मचारियों के पसीने, सांस और गंध में वायरस की उपस्थिति का पता लगाया जा सके, जो मानव शरीर में वायरस के कारण होने वाले उपापचय परिवर्तनों के कारण होता है. हवाईअड्डे अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई कुत्ता किसी व्यक्ति पर वायरस की गंध का संकेत देता है, तो उस व्यक्ति को शीघ्र कोरोनावायरस परीक्षण करने के लिए कहा जाता है.

क्या कुत्ते कोरोनावायरस का पता लगा सकते हैं?  

फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में  रसायन विज्ञान और जैव रसायन के प्रोफेसर केनेथ जी फर्टन ने कहा, "मेरे लिए यह बड़े 'आश्चर्य' की बात है. न केवल कुत्तों को इस काम के लिए प्रशिक्षित किया जा सकता था, बल्कि वे इतने सटीक परिणाम भी दे रहे हैं."

फर्टन ने कहा कि कैनाइन की सटीकता पारंपरिक कोरोनावायरस परीक्षणों और यहां तक ​​​​कि कुछ प्रयोगशाला उपकरणों को भी टक्कर देती है. उन्होंने एफआईयू द्वारा प्रकाशित एक डबल-ब्लाइंड अध्ययन का हवाला दिया, जिसमें पाया गया कि जानवरों ने वायरस का पता लगाने के लिए 96 से 99 प्रतिशत सटीकता दर हासिल की. एक बेट्टा की सटीकता दर 98.1 प्रतिशत थी, जबकि कोबरा की आश्चर्यजनक रूप से 99.4 प्रतिशत थी.

फर्टन ने कोबरा के बारे में कहा, "मनुष्यों सहित हर कोई, किसी न किसी बिंदु पर गलत हो जाता है. लेकिन वह (कुत्ते) लगभग कभी गलत नहीं होती, " 

फर्टन और उनके सहयोगियों ने पिछले साल महामारी की शुरुआत के तुरंत बाद कुत्तों के साथ अपना शोध शुरू किया. हालांकि मियामी पहला अमेरिकी हवाई अड्डा है जहां कुत्तों का इस्तेमाल वायरस का पता लगाने के लिए किया जा रहा है, लेकिन संयुक्त अरब अमीरात और फिनलैंड जैसे देशों ने पिछली गर्मियों में इस विचार का परीक्षण शुरू किया.

मनुष्यों की तुलना में 50 गुना अधिक गंध रिसेप्टर्स के साथ, कुत्तों का उपयोग लंबे समय से न केवल दवाओं और विस्फोटकों को सूंघने के लिए किया जाता है, बल्कि चिकित्सा स्थितियों जैसे कि पार्किंसंस रोग, मधुमेह वाले लोगों में रक्त शर्करा के स्तर में बदलाव और कुछ प्रकार के कैंसर के लिए भी किया जाता है.

कोबरा की नाक को पहले पौधों में फैलने वाली बीमारी का सूंघ कर पता लगाने के लिए रखा गया था: उसे लॉरेल विल्ट की गंध का पता लगाने के लिए प्रशिक्षित किया गया था, एक बीमारी जो एवोकैडो के पेड़ों को मारती है.  
 

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हालांकि कुत्ते अत्यधिक सटीक परिणाम दे रहे हैं. लेकिन कोरोनावायरस का पता लगाने वाले कुत्तों को प्रशिक्षण देने में समय और धन बहुत खर्च हो रहा है. जिससे इसे बढ़ाना एक कठिन कार्यक्रम है. कुत्तों को काम के लिए प्रमाणित होने के लिए कुछ मानकों और स्थापित प्रोटोकॉल को भी पूरा करना होगा.

हालांकि,  कुत्तों के किसी भी नस्ल को इस कार्य के लिए प्रशिक्षित किया जा सकता है: कोबरा और वन बेट्टा शुद्ध नस्ल हैं, लेकिन कार्यक्रम में अन्य प्रमाणित कुत्तों में से दो मिश्रित नस्ल के कुत्ते भी शामिल थे.  

First Published : 12 Sep 2021, 07:36:06 PM

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