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धरती के 751 किलोमीटर नीचे आया भूकंप, वैज्ञानिकों ने जताई हैरानगी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दुनिया के सबसे गहरे भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.9 थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके पहले हल्के भूकंप की लहरें आई थीं.

News Nation Bureau | Edited By : Dhirendra Kumar | Updated on: 11 Nov 2021, 03:29:59 PM
Earthquake

Earthquake (Photo Credit: NewsNation)

highlights

  • सबसे गहरे भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.9 थी
  • भूकंप का केंद्र जापान के बोनिन आइलैंड के नीचे था

नई दिल्ली:

सामान्तया भूकंप जब आते हैं तो उनकी गहराई 10 से 50 किलोमीटर तक ही रहती है. वहीं वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक ऐसे भूकंप का पता लगाया है जिसकी गहराई कई सौ किलोमीटर है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वैज्ञानिकों का कहना है कि यह भूकंप धरती के भीतर 751 किलोमीटर तक की गहराई में आया था. वैज्ञानिकों के द्वारा इस भूकंप को अभी तक के सबसे गहरे भूकंप (Deepest Earthquake) की संज्ञा दी जा रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह भूकंप धरती के लोअर मैंटल (Lower Mantle) में आया हुआ था.

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वैज्ञानिकों ने इस भूकंप को देखकर हैरानगी जताई है. दरअसल, इस सतह पर भूकंप का आना बेहद दुर्लभ है. वैज्ञानिकों की जांच में यह बात सामने आई है कि लोअर मैंटल में अत्यधिक दबाव की वजह से भूकंप आया है. उनका कहना है कि पत्थरों की परत में खिंचाव, दबाव या टूट फूट की वजह से भूकंप की स्थिति बनी हो सकती है. यूनिवर्सिटी ऑफ नेवादा में जियोमटेरियल्स की प्रोफेसर पामेला बर्नली का कहना है कि मिनरल्स से इस तरह के बदलाव की उम्मीद नहीं की जाती है. ऐसे में लोअर मैंटल में दबाव बनने पर इस तरह के भूकंप का आना काफी दुर्लभ है. 

उनका कहना है कि दुनिया के इस सबसे गहरे भूकंप की जांच की जा रही है. उनका कहना है कि स्टडी रिपोर्ट के आने के बाद ही कुछ सही अंदाजा लगाया जा सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दुनिया के सबसे गहरे भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.9 थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके पहले हल्के भूकंप की लहरें आई थीं. भूकंप का केंद्र जापान के बोनिन आइलैंड के नीचे था. जर्नल जियोफिजिल रिसर्च लेटर्स में इस स्टडी को प्रकाशित किया गया है. 

यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के भूकंप विज्ञानी एरिक काइसर का कहना है कि जापान के पास भूकंप को नापने के लिए दुनिया का सबसे बेहतरीन नेटवर्क हाई-नेट एरे (Hi-net Array) है. वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफोर्निया के सीस्मोलॉजिस्ट जॉन विडेल का कहना है कि जापान का यह सिस्टम किसी भी तरह के भूकंप को डिटेक्ट कर सकता है.

First Published : 11 Nov 2021, 03:24:36 PM

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