Vijaya Ekadashi 2026 Vrat: कब है विजया एकादशी का व्रत? नोट कर लें तारीख, शुभ मुहूर्त और पारण का समय

Vijaya Ekadashi 2026: धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, विजया एकादशी पर व्रत रखने के साथ भगवान विष्णु का पूजन, मंत्र-जप और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व होता है. इससे पापों का नाश और मोक्ष प्राप्त होता है. चलिए आपको विजया एकदाशी की तारीख बताते हैं.

Vijaya Ekadashi 2026: धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, विजया एकादशी पर व्रत रखने के साथ भगवान विष्णु का पूजन, मंत्र-जप और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व होता है. इससे पापों का नाश और मोक्ष प्राप्त होता है. चलिए आपको विजया एकदाशी की तारीख बताते हैं.

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Akansha Thakur
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Vijaya Ekadashi 2026 Vrat

Vijaya Ekadashi 2026 Vrat

Vijaya Ekadashi 2026 Vrat: हिंदू धर्म में फाल्गुम माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को विजया एकादशी का व्रत रखा जाता है. एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है. ऐसे में इस दिन व्रत रखने के साथ ही विधि-विधान के साथ श्री नारायण की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम ने विजया एकादशी का व्रत रखा था. इस व्रत के फल प्रभु राम ने रावण को हराया था. चलिए हम आपको इस आर्टिकल में विजया एकदाशी की तिथि, शुभ मुहूर्त और पारण समय के बारे में विस्तार से बताते हैं. 

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विजय एकादशी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त 

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकदाशी तिथि का आरंभ 12 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट पर होगा. तिथि का समापन 13 फरवरी को दोपहर 02 बजकर 25 मिनट पर होगा. विजया एकदाशी का पारण 14 फरवरी को किया जाएगा. 

विजय एकादशी 2026 पारण समय 

विजय एकादशी के पारण समय की बात करें तो 14 फरवरी को सुबह 07 बजकर 07 मिनट से सुबह 09 बजकर 26 मिनट पर होगा. बता दें कि एकादशी के दिन पारण का खास महत्व होता है. पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय दोपहर 04 बजकर 01 मिनट तक रहेगा. एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना जरूरी होता है. द्वादशी तिथि के अंदर पारण न करने के समान माना जाता है. 

विजय एकादशी 2026 पूजा विधि 

अगर आप विजय एकादशी का व्रत कर रहे हैं तो सुबह उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहने. इसके बाद पीला या नारंगी रंग के कपड़े पहनें. फिर पूजा घर या मंदिर को साफ कर गंगाजल छिड़कर घर को शुद्ध कर लें. एक चौकी रख उसपर पीले रंग का कपड़ा बिछा दें. चौकी पर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. फिर घी या तेल का दीया जलाएं और विष्णु जी को चंदन का तिलक लगाकर फूल माला अर्पित करे. 

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