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Shani Pradosh Vrat 2026 (AI Image)
Shani Pradosh Vrat 2026: हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत की विशेष महत्व होता है. आज फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत है. इसे शनि प्रदोष के नाम से भी जाना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत शिवजी को अत्यंत प्रिय है. इस व्रत को करने से महादेव की कृपा मिलती है. इसके साथ ही भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. शनिवार को शनि प्रदोष व्रत होने से यह बेहद खास हो जाता है.
शनिवार को प्रदोष काल में महादेव का अभिषेक करने से शनि की अशुभ महादशा में शांति प्राप्त होती है. शिव के प्रिय भक्त हैं शनिदेव. यही वजह है शनि प्रदोष व्रत पर जो लोग महादेव की पूजा करते हैं उन्हें साढ़ेसाती और ढ़ैय्या की वजह से मिल रहे कष्टों से छुटकारा मिल जाता है. आइए जानते हैं आज की पूजा का मुहूर्त और बेहद खास उपाय.
प्रदोष व्रत तिथि और शुभ मुहूर्त
प्रदोष काल की पूजा का मुहूर्त आज यानी 14 फरवरी को शाम 06 बजकर 10 मिनट से शुरु होगा. इसका समापन रात 08 बजकर 44 मिनट पर होगा. इस मुहू्र्त में ही पूजा करने से प्रदोष व्रत रखने का पूरा फल प्राप्त होगा. इस साल शनि प्रदोष व्रत पर पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र और सिद्ध योग का भी संयोग बन रहा है. शास्त्रों के अनुसार इस संयोग में पूजा करने से महादेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
शनि प्रदोष व्रत के अचूक उपाय
धन प्राप्ति का उपाय
आज प्रदोष काल में महादेव का पंचामृत से अभिषेक करें. उनका श्रंगार चंदन और सफेद फूलों से करें. बेलपत्र, भांग, धतूरा और भस्म चढ़ाएं. ऋतु फल और दूध से बने पदार्थों का भोग लगाएं. श्रद्धा भक्ति के साथ आरती करें. आरती के बाद आसन पर बैठकर 7 माला ऊं नमः शिवाय मंत्र की जप करें. इस उपाय को करने से जीवन में धन की समस्या नहीं रहती. इसके साथ ही घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है.
ग्रहों की बाधा से छुटकारा पाने का उपाय
आज प्रदोष काल में गंगाजल से महादेव का अभिषेक करें. इस गंगाजल में थोड़ा गुड़ और काले तिल अवश्य मिलाएं. अभिषेक के बाद महादेव को बेलपत्र के साथ शमी पत्र अवश्य चढ़ाएं. पूजा और आरती करने के बाद आसन पर बैठकर 7 माला ऊं चंद्रशेखराय नमः मंत्र की जाप करें. इस उपाय को करने से कुंडली के अशुभ ग्रह शांत होते हैं. ग्रहों की वजह से जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं.
साढ़ेसाती के अशुभ प्रभाव से बचने का उपाय
आज प्रदोष काल में महादेव का अभिषेक सरसों के तेल की धारा से करें. अभिषेक के बाद बेलपत्र के साथ शमी पत्र, भांग, धतूरा चढ़ाएं. आरती करने के बाद आसन पर बैठकर 5 माला महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें. इसके साथ ही शनिदेव का तेलाभिषेक करें. पीपल के वृक्ष के पास सरसों के तेल का दीपक जलाएं. इस दीपक में काले तिल अवश्य डालें. इस उपाय को करने से शनि की अशुभ महादशा में शांति प्राप्त होती है. शनि की साढ़ेसाती और ढ़ैय्या की वजह से जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं.
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