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Rohini Vrat 2026 (AI Image)
Rohini Vrat 2026: हिंदू धर्म में नक्षत्रों का विशेष महत्व होता है और इनमें रोहिणी नक्षत्र को बेहद शुभ और मंगलकारी माना जाता है. जैन और हिंदू दोनों ही समुदायों में रोहिणी व्रत का बड़ा महत्व है. पंचांग के अनुसार, साल 2026 का दूसरा रोहिणी व्रत आज यानी 25 फरवरी 2026 को रखा जा रहा है. मान्यता है कि आज के दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से जीवन के सभी दुख दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है. आज के दिन कई शुभ योग का निर्माण भी हो रहा है जो रोहिणी व्रत की पूजा को और भी शुभ बना रहे हैं. चलिए जानते हैं रोहिणी पर पूजा विधि और शुभ मुहूर्त के बारे में.
रोहिणी व्रत 2026 शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि यानी आज 25 फरवरी 2026 को रोहिणी व्रत रखा जाएगा. इस दिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग दोपहर 01 बजकर 38 मिनट तक रहेगा. इस अवधि में पूजा-अर्चना करना बहुत ही शुभ माना गया है. भक्त इस समय भगवान श्रीकृष्ण की विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं.
इन शुभ योगों में करें भगवान श्री कृष्ण की पूजा
आज के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का निर्माण हो रहा है. जैन समुदाय के लिए भी यह व्रत बेहद महत्वपूर्ण है, जहां वे अपने 12 वें तीर्थंकरभगवान वासुपूज्य की पूजा करते हैं तो वहीं हिंदू समुदाय में इस दिन विशेष रूप से भगवान कृष्ण और देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है. इस दिन अगर आप मंदिर नहीं जा पा रहे हैं तो घर पर ही आसान विधि के साथ पूजा कर सकते हैं.
रोहिणी व्रत 2026 पूजा विधि
अगर आज आप रोहिणी का व्रत कर रहे हैं तो सुबह सबसे पहले उठकर स्नान करें. स्वच्छ वस्त्र धारण करें. फिर घर के पूजा स्थान को साफ कर लें. भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. उन्हें पीले वस्त्र, तुलसी दल, फूल और माखन-मिश्री का भोग लगाएँ. घी का दीपक जलाकर रोहिणी व्रत की कथा सुने या पढ़ें. ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें. आंत में आरती करें और प्रसाद चढ़ाएं.
इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप रोहिणी का व्रत कर रहे हैं तो क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें. साथ ही घर में साफ-सफाई और शांति बनाए रखें. मान्यता है कि इस दिन गरीब और जरूरतमंदों को दान करना शुभ माना जाता है.
रोहिणी व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रोहिणी व्रत रखने से दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ता है. संतान प्राप्ति की इच्छा पूर्ण होती है. आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, साथ ही मानसिक शांति मिलती है. यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं के लिए मंगलकारी माना गया है लेकिन पुरुष भी इसे पूरी श्रद्धा से रख सकते हैं. इस व्रत की खास बात है इस दिन पड़ने वाला रोहिणी नक्षत्र.
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