Rohini Vrat 2026: कब रखा जाएगा रोहिणी व्रत, नोट कर लें तारीख, शुभ मुहूर्त और क्या है इस नक्षत्र का भगवान कृष्ण से संबंध?

Rohini Vrat 2026: हिंदू धर्म में व्रत और नक्षत्रों का विशेष महत्व होता है. इन्हीं में से एक है रोहिणी व्रत जो भगवान श्रीकृष्ण से गहराई से जुड़ा हुआ माना जाता है.

Rohini Vrat 2026: हिंदू धर्म में व्रत और नक्षत्रों का विशेष महत्व होता है. इन्हीं में से एक है रोहिणी व्रत जो भगवान श्रीकृष्ण से गहराई से जुड़ा हुआ माना जाता है.

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Akansha Thakur
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Rohini Vrat 2026

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Rohini Vrat 2026: हिंदू धर्म में नक्षत्रों का विशेष महत्व होता है और इनमें रोहिणी नक्षत्र को बेहद शुभ और मंगलकारी माना जाता है. जैन और हिंदू दोनों ही समुदायों में रोहिणी व्रत का बड़ा महत्व है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस व्रत और नक्षत्र का भगवान श्री कृष्ण से एक अटूट संबंध है? आइए जानते हैं इसके पीछे का रहस्य और इस दिन के शुभ मुहूर्त के बारे में.

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रोहिणी व्रत 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त 

हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि यानी कल 25 फरवरी 2026 को रोहिणी व्रत रखा जाएगा. इस दिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग दोपहर 01 बजकर 38 मिनट तक रहेगा. इस अवधि में पूजा-अर्चना करना बहुत ही शुभ माना गया है. भक्त इस समय भगवान श्रीकृष्ण की विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं. 

क्या है इस नक्षत्र का भगवान श्रीकृष्ण से संबंध? 

रोहिणी नक्षत्र का संबंध सीधे तौर पर भगवान कृष्ण से माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. यही कारण है कि यह नक्षत्र श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय माना जाता है. रोहिणी नक्षत्र को चंद्रमा का सबसे प्रिय नक्षत्र भी कहा जाता है. ज्योतिष शास्त्र  में इसे प्रेम, सौंदर्य और आकर्षण का प्रतीक माना जाता है. 

रोहिणी व्रत 2026 पूजा विधि 

रोहिणी व्रत के दिन सबसे पहले सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इशके बाद घर के पूजा स्थल पर श्रीकृष्ण की प्रतिमा स्थापित करें. भगवान श्रीकृष्ण को पंचामृत से स्नान कराएं. पीले फूल, माखन-मिश्री, तुलसी दल अर्पित करें. घी का दीपक जलाएं और आरती करें. ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें. श्रीकृष्ण कथा का पाठ करें. इस दिन व्रत रखने वाले लोग फलाहार कर सकते हैं. 

रोहिणी व्रत का महत्व 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रोहिणी व्रत रखने से दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ता है. संतान प्राप्ति की इच्छा पूर्ण होती है. आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, साथ ही मानसिक शांति मिलती है. यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं के लिए मंगलकारी माना गया है लेकिन पुरुष भी इसे पूरी श्रद्धा से रख सकते हैं. इस व्रत की खास बात है इस दिन पड़ने वाला रोहिणी नक्षत्र.

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