Premanand Ji Maharaj: क्या बिस्तर पर नाम जप करने से मिलता है पूरा फल? प्रेमानंद महाराज ने बताई सच्चाई

Premanand Ji Maharaj: प्रेमानंद जी महाराज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने बताया कि भगवान का नाम जप हर अवस्था में कर सकते हैं, जबकि गुरु मंत्र के जप के लिए शास्त्रों में अलग नियम बताए गए हैं.

Premanand Ji Maharaj: प्रेमानंद जी महाराज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने बताया कि भगवान का नाम जप हर अवस्था में कर सकते हैं, जबकि गुरु मंत्र के जप के लिए शास्त्रों में अलग नियम बताए गए हैं.

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Akansha Thakur
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Premanand Ji Maharaj: अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या भगवान का नाम हर जगह और हर स्थिति में लिया जा सकता है. खासतौर पर शौचालय या बिस्तर जैसी जगहों को लेकर लोगों में कंफ्यूजन बना रहता है. कई लोग सोचते हैं कि ऐसी स्थिति में नाम जप करना अनुचित हो सकता है. इसी विषय पर प्रेमानंद महाराज का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया यानी इंस्टाग्राम पर तेजी से वायरल हो रहा है. 

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क्या बिस्तर पर नाम जप करना चाहिए? 

वीडियो में एक महिला उनसे सीधा सवाल करती नजर आती है. वह पूछती है कि क्या बिस्तर पर बैठकर या लेटे हुए भगवान का नाम लेना सही होता है या नहीं. इस सवाल पर प्रेमानंद महाराज बेहद शांत और सरल शब्दों में जवाब देते हैं. वह कहते हैं कि भगवान का नाम लेने पर कोई रोक नहीं है. व्यक्ति चाहे किसी भी अवस्था में हो, वह ईश्वर का स्मरण कर सकता है. उन्होंने यह भी बताया कि शास्त्रों में नाम जप को पवित्र करने वाला माना गया है.

गुरु मंत्र के लिए बताए कुछ विशेष नियम 

महाराज एक संस्कृत श्लोक का अर्थ समझाते हुए कहते हैं कि इंसान चाहे शुद्ध हो या अशुद्ध, अगर वह भगवान को याद करता है तो वह भीतर और बाहर से पवित्र हो जाता है. उनके अनुसार, नाम स्मरण स्वयं में एक ऐसी शक्ति है जो मन और आत्मा को साफ करती है. 

हालांकि, प्रेमानंद महाराज ने यह भी स्पष्ट किया कि गुरु मंत्र और नाम जप में अंतर होता है. गुरु मंत्र के लिए कुछ विशेष नियम बताए गए हैं. उन्होंने कहा कि जिस बिस्तर पर गृहस्थ जीवन के कार्य होते हैं, वहां बैठकर गुरु मंत्र का जप नहीं करना चाहिए.

शौचालय में गुरु मंत्र का जप वर्जित

इसके अलावा, शौचालय या अपवित्र मानी जाने वाली स्थिति में गुरु मंत्र का जप वर्जित बताया गया है. लेकिन भगवान के नाम का जप इन नियमों से अलग है. इसे किसी भी समय और किसी भी स्थान पर किया जा सकता है.

नाम जप का मुख्य उद्देश्य

महाराज के अनुसार, नाम जप का मुख्य उद्देश्य मन को शुद्ध करना और भगवान से जुड़ाव बढ़ाना है. जब इंसान बार-बार ईश्वर का नाम लेता है, तो उसके विचारों में सकारात्मकता आती है. उसका मन शांत होता है. यही वजह है कि उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वे हर परिस्थिति में भगवान को याद करें. क्योंकि नाम जप न केवल आत्मा को मजबूत करता है, बल्कि इंसान को सही रास्ते पर भी चलने की प्रेरणा देता है.

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