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Mahashivratri 2026
Mahashivratri 2026: हिंदू धर्म में भगवान शिव का विशेष महत्व है. फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है. इस साल 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी जो शाम 05 बजकर 04 मिनट से शुरू होगी और 16 फरवरी को शाम 05 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी. महादेव की भक्ति के लिए रखा जाने वाला यह व्रत बेहद शुभ माना जाता है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत से जुड़े कुछ नियम हैं जिनका पालन करना हर भक्त के लिए जरूरी है. नियमों का श्रद्धा के साथ पालन करने से ही पूरा का पूर्ण फल मिलता है. लेकिन कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि अगर महाशिवरात्रि के दिन जाने-अनजाने में व्रत टूट जाता है तो क्या पूजा का पूर्ण फल मिलता है या नहीं? चलिए आपको बताते हैं व्रत से जुड़े कुछ नियमों के बारे में.
महाशिवरात्रि पर टूट जाए व्रत तो क्या करें?
कई बार स्वास्थ्य कारणों से या अनजाने में व्रत टूट जाता है जिससे भक्त दुखी हो जाते हैं. लेकिन ऐसा हो जाए घबराएं नहीं सबसे पहले अपने मन को शांत रखें. शास्त्रों के अनुसार, अगर अनजाने में व्रत टूट जाए तो महादेव से अपनी गलती के लिए सच्चे मन से क्षमा मांगे. इसके बाद दोबारा स्नान करें और शिवलिंग पर गंगाजल या दूध से अभिषेक करें. महादेव अत्यंत दयालु और भोले हैं वे भक्त की मनोकामना और उनके हृदय के प्रेम को महत्व देते हैं. क्षमा भाव से की गई पूजा दोष को दूर करने में सहायक होती है.
व्रत टूट जाने पर किए जाने वाले उपाय
अगर महाशिवरात्रि के दिन आपका व्रत टूट जाए तो इस दिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति को सफेद चीजें जैसे चावल, दूध या सफेद वस्त्र दान कर सकते हैं. महादेव के पंचाक्षरी मंत्र का 108 बार जाप करना भी मन की शुद्धि के लिए बहुत शुभ माना जाता है. इसके अलावा शाम के समय मंदिर में दीप जलाएं और भगवान शिव की आरती करें. यह क्रिया आपके आत्मविश्वास को वापिस लौटाने और मानसिक शांति प्रदान करने में मदद करती है.
महाशिवरात्रि की पूजा विधि
अगर आप महाशिवरात्रि का व्रत कर रहे हैं तो सबसे पहले सुबह उठकर स्नान करें उसके बाद साफ-सुथरे वस्त्र पहनें. इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना और तामसिक भोजन जैसे- प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा से पूरी तरह दूर रहना चाहिए. व्रत के दौरान मन में किसी के प्रति क्रोध न लाएं. यदि आप फलहारी का व्रत रख रहे हैं तो केवल फूल, दूध और सेंधा नमक का ही इस्तेमाल करें. इस दिन शिव चालीसा का पाठ और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहना चाहिए जिससे मन को शांति मिलती है.
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