Maha Shivratri Vrat Katha: चित्रभानु भील की कथा पढ़े बिना अधूरा है महाशिवरात्रि का व्रत, यहां पढ़े पूरी कहानी

Maha shivratri Vrat Katha: आज महाशिवरात्रि पर व्रत रखकर शिवजी की पूजा करने का विधान है. लेकिन चित्रभानु नामक भील शिकारी को पौराणिक कथा के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है. इसलिए पूजा में यह कथा जरूर पढ़ें.

Maha shivratri Vrat Katha: आज महाशिवरात्रि पर व्रत रखकर शिवजी की पूजा करने का विधान है. लेकिन चित्रभानु नामक भील शिकारी को पौराणिक कथा के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है. इसलिए पूजा में यह कथा जरूर पढ़ें.

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Akansha Thakur
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Maha shivratri Vrat Katha

Maha shivratri Vrat Katha

Maha shivratri Vrat Katha: हिंदू धर्म में भगवान शिव को सबसे प्रमुख देवताओं में गिना जाता है. महाशिवरात्रि का दिन शिव भक्ति, व्रत और साधना के लिए विशेष माना जाता है. यह पर्व हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है. आज यानी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है. इस दिन शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व है. भक्त जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर भगवान शिव से आशीर्वाद मांगते हैं. मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर  चित्रभानु भील शिकारी की कथा सुनने से कई गुना फल मिलता है. चलिए पढ़ते हैं कथा. 

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चार प्रहर की पूजा क्यों है खास? 

महाशिवरात्रि की पूजा सुबह से लेकर रात्रि तक चार प्रहरों में की जाती है. इस दिन व्रत, रात्रि जागरण और शिव मंत्रों का जाप किया जाता है. यही कारण है कि महाशिवरात्रि को सबसे बड़ा आध्यात्मिक पर्व भी कहा जाता है.

भील शिकारी चित्रभानु की कथा (Shiv Puran Maha Shivratri Sampurn Katha in Hindi)

प्राचीन समय में चित्रभानु नाम का एक भील शिकारी था. वह शिकार करके अपने परिवार का पालन करता था. एक साहूकार से लिया गया कर्ज न चुका पाने के कारण उसे बंदी बना लिया गया. जिस स्थान पर उसे रखा गया, वहीं एक शिव मठ था. संयोग से वह दिन शिवरात्रि का ही था. शिकारी ने वहीं शिवरात्रि की कथा सुनी. शाम होते ही साहूकार ने उसे यह शर्त रखकर छोड़ दिया कि अगले दिन कर्ज चुका देना होगा.

अनजाने में हुआ शिव पूजन

मुक्त होने के बाद शिकारी भूख और प्यास से व्याकुल होकर जंगल गया. वह एक बेल के पेड़ पर चढ़कर शिकार का इंतजार करने लगा. उस पेड़ के नीचे शिवलिंग स्थापित था, लेकिन शिकारी को इसका ज्ञान नहीं था. पेड़ पर चढ़ते समय बेलपत्र टूटकर शिवलिंग पर गिरते रहे. इस तरह वह अनजाने में व्रत और पूजा करता रहा. 

रात में एक-एक कर हिरणी और हिरण आए. सभी ने अपने-अपने कारण बताकर जीवनदान मांगा. शिकारी ने करुणा दिखाते हुए सबको जाने दिया. हर बार पेड़ पर चढ़ते समय बेलपत्र शिवलिंग पर गिरते रहे. इस तरह चारों प्रहर की पूजा पूर्ण हो गई.

शिव कृपा से जीवन परिवर्तन

सुबह होते ही हिरण पूरे परिवार के साथ वापस लौट आए. यह दृश्य देखकर शिकारी का हृदय बदल गया. उसने सभी को जीवनदान दे दिया.मान्यता है कि इस अनजाने व्रत, जागरण और करुणा के कारण भगवान शिव प्रसन्न हुए. चित्रभानु को मोक्ष की प्राप्ति हुई और वह शिवलोक को प्राप्त हुआ.

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी मान्यताओं पर आधारित है. न्यूज नेशन किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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