Janaki Jayanti Vrat Katha: माता सीता के जन्मोत्सव पर जरूर पढ़े ये खास व्रत कथा, वरना अधूरी रह जाएगी पूजा

Janaki Jayanti Vrat Katha: आज यानी 9 फरवरी 2026 को जानकी जयंती माता सीता के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है. इस दिन श्रीराम और माता सीता की पूजा कि जाती है. इस दिन पूजा के समय व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए.

Janaki Jayanti Vrat Katha: आज यानी 9 फरवरी 2026 को जानकी जयंती माता सीता के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है. इस दिन श्रीराम और माता सीता की पूजा कि जाती है. इस दिन पूजा के समय व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए.

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Akansha Thakur
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Janaki Jayanti Vrat Katha

Janaki Jayanti Vrat Katha

Janaki Jayanti Vrat Katha: हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जानकी जयंती मनाई जाती है. यह पर्व माता सीता के जन्मोत्सव दिवस के रूप में जाना जाता है. इस दिन श्रद्धालु माता सीता और भगवान श्रीराम की पूजा करते हैं. मान्यता है कि इस व्रत से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है. पति की आयु लंबी होती है और वैवाहिक जीवन खुशहाल बनता है. जानकी जयंती के दिन व्रत रखने के साथ व्रत कथा का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है. आइए पढ़ते हैं व्रत कथा.

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जानकी जयंती व्रत कथा ( Janaki Jayanti Vrat Katha In Hindi) 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक समय की बात है जब मिथिला राज्य में भीषण अकाल पड़ा. कई वर्षों तक वर्षा नहीं हुई. चारों ओर दुख और परेशानी थी.
मिथिला के राजा जनक बहुत चिंतित थे. उन्होंने अकाल से मुक्ति के लिए यज्ञ करवाए. ऋषि-मुनियों से सलाह ली. साथ ही स्वयं भी प्रजा की भलाई के लिए आगे आए. राजा जनक हल लेकर खेत जोतने लगे. तभी उनका हल जमीन में एक जगह अटक गया. उन्होंने बहुत प्रयास किया, लेकिन हल बाहर नहीं निकला. आसपास के लोग भी मदद के लिए आए, पर सफलता नहीं मिली.

फिर उस स्थान की मिट्टी हटाई गई. मिट्टी हटते ही वहां से एक दिव्य कन्या प्रकट हुई. राजा जनक निःसंतान थे. उन्होंने उस कन्या को गोद में उठा लिया.
कन्या के प्रकट होते ही आकाश से तेज वर्षा होने लगी. वर्षों से पड़ा अकाल समाप्त हो गया. यह नजारा देखकर राजा जनक और पूरी प्रजा आनंद से भर गई. राजा जनक ने उस कन्या को अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया और उसका नाम सीता रखा.

माता सीता के आगमन से बदली मिथिला की तस्वीर

माता सीता के प्रकट होते ही मिथिला में खुशहाली लौट आई. सूखे खेतों में फिर से हरियाली आ गई. फसलें लहलहाने लगीं. मान्यता है कि जिस दिन माता सीता धरती से प्रकट हुई थीं, वह फाल्गुन मास की कृष्ण अष्टमी तिथि थी. इसी कारण यह तिथि आज भी जानकी जयंती के रूप में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाती है.

माता सीता का मंत्र 

ॐ जनकजाये विद्महे रामप्रियाय धीमहि। तन्नो सीता प्रचोदयात्।।
ॐ जनकनन्दिन्यै विद्महे रामवल्लभायै धीमहि। तन्न: सीता प्रचोदयात्।।
ॐ सीतायै नमः
ॐ श्री सीता रामाय नमः"
श्री जानकी रामाभ्यां नमः

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Janaki Jayanti 2026
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