साल में एक बार खुलता है ये 800 साल पुराना मंदिर, कभी नहीं बुझता दीया, बेहद अनोखी है कहानी

Hasanamba Temple: कर्नाटक के हसन में स्थित एक ऐसा रहस्यमयी मंदिर है जो अपनी रहस्यमयी परंपराओं के लिए मशहूर है. यह अद्वितीय स्थल साल में केवल एक बार ही खुलता है. चलिए हम आपको इस मंदिर के बारे में बताते हैं.

Hasanamba Temple: कर्नाटक के हसन में स्थित एक ऐसा रहस्यमयी मंदिर है जो अपनी रहस्यमयी परंपराओं के लिए मशहूर है. यह अद्वितीय स्थल साल में केवल एक बार ही खुलता है. चलिए हम आपको इस मंदिर के बारे में बताते हैं.

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Akansha Thakur
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Hasanamba Temple

Hasanamba Temple

Hasanamba Devi: भारत में मंदिरों की कोई कमी नहीं है. हर राज्य और हर शहर में ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जिनकी अपनी अलग पहचान और अनोखी परंपरा होती है. इन्हीं में से एक है कर्नाटक के हसन जिले में स्थित हसनंबा देवी मंदिर. यह मंदिर अपनी अनोखी मान्यताओं और रहस्यमयी परंपराओं के कारण देशभर में काफी मशहूर है.

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800 साल पुराना है ये मंदिर  

हसनंबा मंदिर करीब 800 साल पुराना माना जाता है. इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में होयसला स्थापत्य शैली में हुआ था. मंदिर की मुख्य देवी आदि शक्ति हैं. इसकी बनावट भी बेहद खास है. कहा जाता है कि मंदिर को चींटी के टीले के आकार में बनाया गया है, जो इसे और भी अलग पहचान देता है.

इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह साल में सिर्फ एक बार खुलता है. हर साल दिवाली के दिन मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोले जाते हैं. इस दिन दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल बन जाता है.

मंदिर के अंदर की अनोखी झलक

मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही सिद्धेश्वर स्वामी के दर्शन होते हैं. यहां भगवान शिव को सामान्य शिवलिंग के रूप में नहीं, बल्कि अर्जुन को पशुपतास्त्र देते हुए दर्शाया गया है. इसके अलावा यहां रावण की दस सिरों वाली वीणा बजाती हुई मूर्ति भी देखने को मिलती है, जो भक्तों को हैरान कर देती है.

कभी नहीं बुझता दीया

दिवाली के दिन मंदिर के अंदर दो बोरी चावल, पानी और एक घी का दीपक रखा जाता है. इस दीपक को नंदा दीपम कहा जाता है. मंदिर को फूलों से सजाया जाता है और फिर बंद कर दिया जाता है. एक साल बाद जब मंदिर दोबारा खुलता है, तो चावल पका हुआ और गर्म मिलता है. कहा जाता है कि वह खराब नहीं होता. नंदा दीपम में रखा घी भी पूरे साल जलता रहता है. यही रहस्य इस मंदिर को खास बनाता है.

हसनंबा मंदिर की कहानी 

हसनंबा का अर्थ है वह माता, जो मुस्कुराकर अपने भक्तों को वरदान देती हैं. एक लोककथा के अनुसार, देवी ने एक दुखी बहू की रक्षा के लिए उसे पत्थर में बदल दिया. इस पत्थर को ‘शोशी कल’ कहा जाता है. मान्यता है कि यह पत्थर हर साल देवी की ओर थोड़ा-थोड़ा बढ़ता है और कलियुग के अंत में देवी तक पहुंच जाएगा.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यूज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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Karnatak Hasanamba Temple
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