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Sankashti Chaturthi 2024: फाल्गुन माह की संकष्टी चतुर्थी आज? बस इस मुहूर्त में करें गणपति की पूजा!

Sankashti Chaturthi 2024 Kab Hai: आइए जानते हैं फाल्गुन माह की संकष्टी चतुर्थी व्रत कब मनाई जाएगी. इसके साथ जानिए संकष्टी चतुर्थी व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और नियम.

Updated on: 28 Feb 2024, 10:36 AM

नई दिल्ली :

Sankashti Chaturthi 2024: संकष्टी चतुर्थी हिंदू धर्म में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है. हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है. इसे द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है.यह व्रत भगवान गणेश और चंद्रमा को समर्पित है.  इस व्रत को रखने से सुख-समृद्धि, संतान प्राप्ति, विघ्नों का नाश, मनोकामनाओं की पूर्ति और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा और व्रत करने से इंसान को सभी प्रकार के दुख और संकट से छुटकारा मिलता है. इसके साथ ही सभी कार्यों में सफलता हासिल होती है. आइए जानते हैं फाल्गुन माह की संकष्टी चतुर्थी व्रत कब मनाई जाएगी. इसके साथ जानिए संकष्टी चतुर्थी व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और नियम. 

कब मनाई जाएगी फाल्गुन माह की संकष्टी चतुर्थी?

हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह की संकष्टी चतुर्थी 28 फरवरी 2024 को मनाई जाएगी. 

संकष्टी चतुर्थी 2024 का शुभ मुहूर्त

संकष्टी चतुर्थी - 28 फरवरी 2024 दिन बुधवार
फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि प्रारंभ - 28 फरवरी 2024 को सुबह 1 बजकर 53 मिनट से
फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि समापन - 29 फरवरी 2024 को सुबह 4 बजकर 18 मिनट पर 

पूजा का शुभ मुहूर्त: 28 फरवरी 2024, 11:07 AM से 01:23 PM
चंद्रोदय का समय: 28 फरवरी 2024, 08:57 PM

संकष्टी चतुर्थी का महत्व

फाल्गुन माह की संकष्टी चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है। यह व्रत भगवान गणेश और चंद्रमा को समर्पित है। इस व्रत को रखने से सुख-समृद्धि, संतान प्राप्ति, विघ्नों का नाश, मनोकामनाओं की पूर्ति और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

संकष्टी चतुर्थी व्रत की पूजा विधि

संकष्टी चतुर्थी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें और उनका पूजन करें. व्रत की कथा पढ़ें और गणेश जी की आरती करें. चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें और व्रत का पारण करें. 

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं. न्यूज नेशन इस बारे में किसी तरह की कोई पुष्टि नहीं करता है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

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