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Ganga Dussehra: आने वाला है गंगा दशहरा, पितरों को प्रसन्न करने के लिए जरूर करें ये उपाय 

Pitron Ko Kaise Khush Kare: पितरों को प्रसन्न करने के लिए गंगा दशहरा के दिन कुछ विशेष उपाय किए जाते हैं. अगर आप जीवन में तरक्की और उन्नति चाहते हैं तो ये उपाय कर सकते हैं.

Updated on: 24 May 2024, 02:41 PM

New Delhi :

Ganga Dussehra: गंगा दशहरा हिन्दू पंचांग का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है जो ज्येष्ठ मास की शुक्ल दशमी को मनाया जाता है. ये मां गंगा के अवतरण का प्रतीक माना जाता है. गंगा दशहरा, हिंदू पंचांग का महत्वपूर्ण त्योहार, पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का एक विशेष अवसर होता है. इस दिन, सूर्य ग्रह वृषभ राशि में प्रवेश करता है, जो पितृ पक्ष की शुरुआत का प्रतीक है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गंगा दशहरा पर किए गए पितृ संबंधी उपाय अत्यंत फलदायी होते हैं. इन उपायों से पितृ प्रसन्न होते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है. गंगा दशहरा को गंगा जयंती और भीष्म पितामह निर्वाण दिवस के रूप में भी जाना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु ने अपने चक्र से पृथ्वी पर गंगा नदी को अवतरित किया था. महाभारत युद्ध के बाद, भीष्म पितामह ने इसी दिन शरशैया पर लेटकर सूर्य की ओर मुख करके प्राण त्याग दिए थे. गंगा दशहरा को पवित्र नदी गंगा में स्नान करने का विशेष महत्व है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. गंगा दशहरा 2024 में 16 जून, रविवार को मनाया जाएगा.

गंगा दशहरा 2024 पर पितर तर्पण का शुभ मुहूर्त

सुबह का मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: 4:03 AM से 4:45 AM तक

विजय मुहूर्त: 5:46 AM से 6:30 AM तक

अभिजित मुहूर्त: 11:51 AM से 12:38 PM तक

दोपहर का मुहूर्त

आनंद मुहूर्त: 3:32 PM से 4:19 PM तक

विजय मुहूर्त: 5:06 PM से 5:53 PM तक

शाम का मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त: 8:22 PM से 9:09 PM तक

रात का मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त: 11:46 PM से 12:33 AM तक

गंगा दशहरा के दिन पितर तर्पण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है. यह दिन पितृ पक्ष की शुरुआत का प्रतीक है, और इस दिन किए गए पितृ संबंधी उपाय अत्यंत पुण्यकारी होते हैं.

गंगा दशहरा के दिन पितर को प्रसन्न करने के उपाय

1. तर्पण

गंगा दशहरा के दिन, सूर्योदय से पहले स्नान कर, स्वच्छ वस्त्र पहनकर, पवित्र स्थान पर बैठकर, पितरों का ध्यान करते हुए तर्पण करना चाहिए. तर्पण में जल, तिल, अक्षत, कुश, जौ, दूध, घी, शहद आदि का प्रयोग किया जाता है. तर्पण करते समय पितरों के नाम का उच्चारण करना चाहिए और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करनी चाहिए.

2. पिंडदान

गंगा दशहरा के दिन, गंगा नदी के किनारे या किसी पवित्र स्थान पर पिंडदान करना भी अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है. पिंडदान में, पितरों के नाम से आटे या चावल के पिंड बनाकर, उन्हें गाय, कौवा, कुत्ता आदि को खिलाया जाता है. पिंडदान करते समय पितरों के मंत्रों का जाप करना चाहिए. 

3. दान 

गंगा दशहरा के दिन, दान-पुण्य करना भी पितरों को प्रसन्न करने का एक प्रभावी उपाय है. इस दिन, गरीबों, ब्राह्मणों, या किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को दान-दक्षिणा देनी चाहिए. दान में अन्न, वस्त्र, धन, या कोई भी उपयोगी वस्तु दी जा सकती है.

4. श्राद्ध

गंगा दशहरा के दिन, पितरों के नाम से श्राद्ध करना भी पितृ ऋण से मुक्ति पाने का एक उत्तम उपाय है. श्राद्ध में, पितरों के नाम से भोजन बनाकर, उन्हें भोग लगाया जाता है. श्राद्ध करते समय पितरों के मंत्रों का जाप करना चाहिए और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करनी चाहिए.

5. दीपदान

गंगा दशहरा के दिन, सूर्यास्त के समय, गंगा नदी के किनारे या किसी पवित्र स्थान पर दीपदान करना भी पितरों को प्रसन्न करने का एक सरल उपाय है. दीपदान में, घी या तेल का दीया जलाकर, उसे गंगा नदी में प्रवाहित करना चाहिए. दीपदान करते समय पितरों के मंत्रों का जाप करना चाहिए.

गंगा दशहरा के दिन गंगा नदी में स्नान करने से व्यक्ति स्वस्थ और धनवान होता है. इस दिन दान-पुण्य करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. गंगा की पूजा करने से ग्रहों की शांति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. गंगा दशहरा के दिन पितरों का तर्पण करने से पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है. इस दिन गंगा नदी के किनारे मेले का आयोजन किया जाता है. लोग गंगा नदी में स्नान करते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और दान-पुण्य करते हैं. मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है. घरों में दीप प्रज्ज्वलित किए जाते हैं और गंगा माता की आरती उतारी जाती है. गंगा दशहरा हमें पवित्रता, आध्यात्मिकता और पर्यावरण के महत्व का संदेश देता है. यह दिन हमें पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और दान-पुण्य करने का अवसर भी प्रदान करता है. इन उपायों के अलावा, गंगा दशहरा के दिन पितरों को प्रसन्न करने के लिए पितरों के प्रति स्नेह और कृतज्ञता व्यक्त करें. उनकी स्मृति में श्रद्धांजलि अर्पित करें और पितरों के पसंदीदा भोजन का दान करें. उनके नाम से पेड़ लगाएं, गायों को भोजन कराएं और पानी पिलाएं. गंगा दशहरा पर किए गए पितृ संबंधी उपाय श्रद्धा और विश्वास के साथ किए जाने चाहिए. इन उपायों से पितृ प्रसन्न होते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है. 

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं. न्यूज नेशन इस बारे में किसी तरह की कोई पुष्टि नहीं करता है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)