News Nation Logo
Banner

Chaitra Navratri 2022 Maa Chandraghanta Puja Vidhi and Katha: चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पढ़ें ये कथा और अपनाएं ये पूजन विधि, अलौकिक शक्तियों की होगी प्राप्ति

इस साल चैत्र नवरात्रि (chaitra navratri 2022) 2 अप्रैल से शुरू है. जिसमें तीसरा दिन (maa chandraghanta puja vidhi) मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है. तो, चलिए जान लें कि इस दिन मां चंद्रघंटा की पूजा विधि (maa chandraghanta katha) और व्रत कथा क्या है.

News Nation Bureau | Edited By : Megha Jain | Updated on: 23 Mar 2022, 12:06:16 PM
maa chandraghanta puja vidhi and katha

maa chandraghanta puja vidhi and katha (Photo Credit: social media)

नई दिल्ली:  

इस साल चैत्र नवरात्रि (chaitra navratri 2022) 2 अप्रैल से शुरू है. जिसमें तीसरा दिन (chaitra navratri 2022 day 3) मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है. इस दिन मां चंद्रघण्टा के पूजन का विधान है. मां चंद्रघण्टा (maa chandraghanta) अपने मस्तक पर भगवान शिव के अद्ध चंद्र को सुशोभित करने के कारण इन्हें चंद्रघण्टा कहा जाता है. इनके शरीर का रंग सोने के समान बहुत चमकीला है. इस देवी के दस हाथ हैं, जिनमें वो खड्ग और अन्य अस्त्र-शस्त्र धारण करती हैं. सिंह पर सवार (chaitra Navratri 2022 puja) इस देवी दैत्यों के नाश और भक्तों को अभयदान प्रदान करती हैं. इनके घंटे की भयानक ध्वनि से अत्याचारी दानव-दैत्य और राक्षस कांपते रहते हैं. मां चंद्रघण्टा के पूजन से अलौकिक शक्तियों की प्राप्ति होती है. तो, चलिए जानते हैं मां चंद्रघंटा की पूजन विधि और व्रत कथा क्या है.  

यह भी पढ़े : Chaitra Navratri 2022 Bhog: चैत्र नवरात्रि में नौ देवियों को लगाएं इन खास व्यंजनों का भोग, मां की बरसेगी विशेष कृपा

मां चंद्रघंटा की पूजन विधि 
चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. ये नवदुर्गा का तीसरा रूप हैं. इस दिन सुबह-सुबह स्नान करके मां चंद्रघंटा की पूजा करते समय लकड़ी की चौकी पर माता चंद्रघंटा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. फिर गंगाजल या गोमूत्र से शुद्धिकरण (Maa Chandraghanta Puja Vidhi) करें. इसके बाद चौकी पर चांदी, तांबे या मिट्टी का घड़ा रख दें. इस पर नारियल रख दें. फिर पूजा का संकल्प लें. फिर वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा मां चंद्रघंटा के साथ सभी देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें.

यह भी पढ़े : Chaitra Navratri 2022 Maa Brahmacharini Aarti: चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन करें मां ब्रह्मचारिणी की ये आरती, इन गुणों में होगी वृद्धि

उसके बाद मां चंद्रघण्टा को धूप, दीप, रोली, चंदन, अक्षत अर्पित करें. मां को लाल रंग के पुष्प और लाल सेब चढ़ाना चाहिए. मां चंद्रघण्टा को दूध या दूध की खीर का भोग लगाना चाहिए. इसके बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ करके मां चंद्रघण्टा के मंत्रों का जाप करना चाहिए. पूजन (maa chandraghanta story) का अंत मां की आरती गाकर किया जाता है. मां के पूजन में घण्टा जरूर बजाएं, ऐसा करने से आपके घर की सभी नकारात्मक और आसुरी शक्तियों का नाश होता है.  

यह भी पढ़े : Saraswati Maa Chalisa: सरस्वती माता का पढ़ें ये चालीसा, ज्ञान हो जाएगा और भी गहरा

मां चंद्रघंटा की व्रत कथा 
अब, हमने पूजा विधि तो बता दी. लेकिन, जरा ये भी जान लें कि इस दिन की व्रत कथा क्या है. पौराणिक कथा के अनुसार, दानवों के आतंक को खत्म करने के लिए मां दुर्गा ने मां चंद्रघंटा का स्वरूप लिया था. महिषासुर नाम के राक्षस ने देवराज इंद्र का सिंहासन (maa chandraghanta vrat katha) हड़प लिया था. वह स्वर्गलोक पर राज करना चाहता था. उसकी यह इच्छा जानकार देवता बेहद ही चितिंत हो गए थे. देवताओं ने इस परेशानी के लिए त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश की मदद मांगी. यह सुनकर त्रिदेव क्रोधिक हो गए. इस क्रोध के चलते तीनों के मुख से जो ऊर्जा उत्पन्न हुई उससे एक देवी का जन्म हुआ.

यह भी पढ़े : Puja For Successful Life: इन चीजों की रोजाना करेंगे पूजा, चढ़ते जाएंगे जीवन में सफलता की सीढ़ी

भगवान शंकर ने इन्हें अपना त्रिशूल और भगवान विष्णु ने अपना चक्र प्रदान किया. फिर इसी प्रकार से दूसरे सभी देवी देवताओं ने भी माता को अपना-अपना अस्त्र सौंप दिया. वहीं, इंद्र ने मां को अपना एक घंटा दिया था. इसके बाद मां चंद्रघंटा महिषासुर का वध करने पहुंची. तो, वहां मां का ये रूप देख महिषासुर को आभास हुआ कि उसका काल नजदीchक है. महिषासुर ने माता रानी पर हमला बोल दिया. जिसके बाद मां चंद्रघंटा ने महिषासुर का संहार कर दिया. इसी तरह से मां ने देवताओं की (maa chandraghanta katha) रक्षा की. 

First Published : 23 Mar 2022, 12:05:59 PM

For all the Latest Religion News, Dharm News, Download News Nation Android and iOS Mobile Apps.