Chandra Grahan 2026: गर्भवती महिलाओं के लिए क्यों अशुभ है चंद्र ग्रहण? भूलकर भी न करें ये 8 गलतियां

Chandra Grahan 2026: 3 मार्च को ग्रहण लगने जा रहा है ऐसे में गर्भवती महिलाओं को घर में रहने के लिए कहा जाता है. यह नियम सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि वैज्ञानिक नजरिए से भी जरूरी है.

Chandra Grahan 2026: 3 मार्च को ग्रहण लगने जा रहा है ऐसे में गर्भवती महिलाओं को घर में रहने के लिए कहा जाता है. यह नियम सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि वैज्ञानिक नजरिए से भी जरूरी है.

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Akansha Thakur
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Chandra Grahan 2026 (AI Image)

Chandra Grahan 2026: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण फाल्गुन मास की पूर्णिमा को पड़ रहा है. इस दिन होलिका दहन भी किया जाएगा. शास्त्रों में चंद्र ग्रहण का समय अशुभ माना गया है. खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए इस दौरान कई सावधानियां जरूरी बताई जाती है. मान्यता है कि ग्रहण के समय नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है, इसलिए कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक होता है. आइए जानते हैं चंद्र ग्रहण की तारीख, सूतक काल और गर्भवती महिलाओं के लिए जरूरी सावधानियां.

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चंद्र ग्रहण 2026 तिथि और समय

चंद्र ग्रहण की शुरुआत 3 मार्च, दोपहर 03 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा और शाम 06 बजकर 47 मिनट पर समाप्त हो जाएगा. सूतक काल के ग्रहण से 9 घंटे पहले. सूतक की शुरुआत 3 मार्च, सुबह 06:20 बजे से शुरू होगा और शाम 06:47 बजे खत्म हो जाएगा.  यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए सूतक काल भी मान्य होगा.

चंद्र ग्रहण के समय गर्भवती महिलाएं क्या न करें

ग्रहण के दौरान बाहर निकलने से बचें.
चंद्र ग्रहण को देखने से परहेज करें.
इस समय गुस्सा, तनाव और विवाद से दूर रहें.
ग्रहण के दौरान भोजन न करें. बहुत जरूरत हो तो तुलसी पत्र डालकर ही सेवन करें.
सुई, चाकू, कैंची जैसी नुकीली चीजों का इस्तेमाल न करें.
ग्रहण के समय सोना नहीं चाहिए.
बाल और नाखून काटने से बचें.
तेल मालिश न करें.
ग्रहण शुरू होने से पहले पेट पर गेरु का लेप लगाना शुभ माना जाता है.

गर्भवती महिलाएं चंद्र ग्रहण में क्या करें

सूतक लगते ही खाने-पीने की चीजों में तुलसी पत्र डाल दें. ग्रहण के दौरान घर के अंदर ही रहें और खिड़की-दरवाजे बंद रखें. अपने इष्ट देव के मंत्रों का जाप करें. “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें.ग्रहण समाप्त होने पर स्नान करें या गंगाजल का छिड़काव कर वस्त्र बदलें. ग्रहण के बाद जरूरतमंदों को अन्न, फल, वस्त्र या धन का दान करें.

चंद्र ग्रहण का महत्व

मान्यता है कि ग्रहण काल में नियमों का पालन करने से नकारात्मक प्रभावों से बचाव होता है. गर्भवती महिलाओं के लिए यह समय और भी संवेदनशील माना गया है. शांत मन से ईश्वर का स्मरण करने से मानसिक शांति मिलती है और अशुभ प्रभाव कम होते हैं.

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