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Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026
Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026: सनातन परंपरा में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना गया है. किसी भी शुभ कार्य से पहले गणपति की आराधना की जाती है. चतुर्थी तिथि विशेष रूप से गणेश जी को समर्पित है. हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है. चैत्र मास की कृष्ण चतुर्थी को यह व्रत भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी कहलाता है. भालचंद्र का अर्थ है जिनके मस्तक पर चंद्रमा सुशोभित हो. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से व्रत और पूजा करने पर बड़े से बड़े विघ्न दूर होते हैं. घर में सुख-समृद्धि आती है और कष्टों से मुक्ति मिलती है.
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि आरंभ 06 मार्च 2026, शाम 07 बजकर 53 मिनट तक होगा और समापन 07 मार्च 2026, शाम 07 बजकर 17 मिनट पर होगा. वहीं चंद्रोदय का समय 06 मार्च 2026, रात 09:31 बजे तक होगा. इन समयों को देखते हुए भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत 06 मार्च 2026 (शुक्रवार) को रखा जाएगा.
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें. स्वच्छ वस्त्र पहनें. पूजा स्थान पर चौकी रखें और उस पर लाल कपड़ा बिछाएं.भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. गाय के शुद्ध घी का दीपक और धूप जलाएं. गणपति जी को गंगाजल से स्नान कराएं. सिंदूर का तिलक लगाएं. अक्षत, पीले फूल और दूर्वा अर्पित करें. मोदक या मोतीचूर लड्डू का भोग लगाएं. मंत्र जप करें “ॐ भालचंद्राय नमः”. संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा पढ़ें. कपूर से आरती करें. चंद्रमा निकलने पर दूध, जल और अक्षत मिलाकर अर्घ्य दें. इसके बाद व्रत का पारण करें.
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व
यह व्रत धैर्य, आस्था और संकल्प का प्रतीक है. माना जाता है कि भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर गणपति की आराधना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं. मन को शांति मिलती है और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है.
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