Antim Sanskar Rituals: अंतिम संस्कार में मृत व्यक्ति के पैर क्यों छुए जाते हैं? जानिए इस परंपरा के पीछे का धार्मिक रहस्य

Antim Sanskar Rituals: जब भी किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो घर-परिवार में उससे छोटे लोग मृत व्यक्ति के पैरों को छूते हैं. लेकिन क्या आप इसके पीछे की वजह जानते हैं? चलिए हम आपको बताते हैं इसके बारे में.

Antim Sanskar Rituals: जब भी किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो घर-परिवार में उससे छोटे लोग मृत व्यक्ति के पैरों को छूते हैं. लेकिन क्या आप इसके पीछे की वजह जानते हैं? चलिए हम आपको बताते हैं इसके बारे में.

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Akansha Thakur
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Antim Sanskar Rituals

Antim Sanskar Rituals

Antim Sanskar Rituals: सनातन धर्म में जीवन को एक यात्रा माना गया है. इस यात्रा का अंतिम पड़ाव मृत्यु होता है. मृत्यु के बाद व्यक्ति के लिए जो धार्मिक क्रियाएं की जाती हैं, उन्हें अंतिम संस्कार कहा जाता है. शास्त्रों में इन परंपराओं का विशेष महत्व बताया गया है.

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इन्हीं परंपराओं में से एक है मृत व्यक्ति के पैरों को छूना, लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर किसी के निधन के बाद उसके पैर क्यों छुए जाते हैं. क्या इसके पीछे केवल भावना है या कोई धार्मिक कारण भी है? आइए इस परंपरा के अर्थ और महत्व को समझते हैं.

क्यों छुए जाते हैं मृत व्यक्ति के पैर?

मृत व्यक्ति के पैर छूना उसके प्रति अंतिम सम्मान प्रकट करने का तरीका माना जाता है. यह एक तरह से धन्यवाद कहने जैसा होता है. जीवन में उसने जो स्नेह, मार्गदर्शन और सहयोग दिया, उसके लिए मन से आभार जताया जाता है.

सनातन परंपरा में बड़े-बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया जाता है. यही भाव मृत्यु के बाद भी बना रहता है. यह दिखाता है कि संबंध केवल जीवन तक सीमित नहीं होते, बल्कि भावनाएं अंत तक जुड़ी रहती हैं.

अंतिम विदाई का प्रतीक

मृत व्यक्ति के पैर छूना एक तरह की अंतिम विदाई मानी जाती है. यह पल परिवार और करीबी लोगों के लिए बेहद भावुक होता है. माना जाता है कि इस समय आत्मा अपनी नई यात्रा की ओर बढ़ती है.

ऐसे में अंतिम बार चरण स्पर्श कर व्यक्ति मन ही मन शांति और आशीर्वाद की कामना करता है. इससे दिल को सुकून मिलता है और दुख को सहने की ताकत मिलती है.

परंपरा के पीछे का धार्मिक रहस्य

किसी अपने को खोना जीवन का सबसे बड़ा दुख होता है. इस दर्द को शब्दों में बयां करना आसान नहीं होता. अंतिम संस्कार के समय किया गया यह छोटा सा कर्म मन को थोड़ी शांति देता है.

माना जाता है कि इससे सच्चाई को स्वीकार करने में मदद मिलती है. व्यक्ति अपने मन की भावनाओं को व्यक्त कर पाता है. यही वजह है कि इस परंपरा को आज भी निभाया जाता है.

सामाजिक और धार्मिक महत्व

यह परंपरा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक भी है. यह सिखाती है कि रिश्तों में सम्मान सबसे ऊपर होता है. जीवन के आखिरी क्षणों में भी यह सम्मान बना रहता है. इसी वजह से परिवार के छोटे सदस्य अपने से बड़े मृत व्यक्ति के पैर छूते हैं. यह भावनात्मक जुड़ाव और संस्कारों की पहचान है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यूज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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