आखिर क्या है गांधी उपनाम का अर्थ? व्यापारियों से लेकर धार्मिक समूह तक करते हैं इस्तेमाल

गांधी उपनाम मोध उपसंप्रदाय से संबंधित है, ये जैन धर्म, पारसियों और व्यापारियों में उपयोग किया जाता रहा है.

गांधी उपनाम मोध उपसंप्रदाय से संबंधित है, ये जैन धर्म, पारसियों और व्यापारियों में उपयोग किया जाता रहा है.

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Mohit Saxena
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महात्मा गांधी या​नि मोहन दास करमचंद गांधी ने देश की आजादी के लिए अहम योगदान दिया. पूरे देश ने महात्मा गांधी के पीछे चलकर अहिंसा आंदोलन को सफल बनाया. उनकी प्रेरणा से देश ने गुलामी की जंजीरों को तोड़कर आजादी का स्वाद चखा. इसके बाद से 'गांधी' उपनाम हमेशा से देश की राजनीति में प्रचलित रहा. यह उपनाम पूर्व पीएम इंदिरा गांधी से जुड़ा और इसके बाद उनके बेटे राजीव गांधी, संजय गांधी से संबंधित रहा. आज राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की इस उपनाम से पहचान है.   

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आज हम गांधी उपनाम के कुछ तथ्य पेश करेंगे. इससे पता चलेगा कि इस उपनाम वाले लोग किस संप्रदाय से ताल्लुक रखते हैं. गांधी उपनाम मोध उपसंप्रदाय से जुड़ा हुआ है. यह वह उपसमूह हैं जो अंबानी परिवार में शामिल है. यह उपनाम जैन धर्म और पारसियों से भी जुड़ा हुआ है. महात्मा गांधी इस संप्रदाय के सबसे मशहूर शख्स हैं. वहीं गंधी एक पेशे से जुड़ा उपनाम है. गुजरात में विभिन्न धार्मिक समूहों के व्यापारियों की ओर से इसे उपयोग किया जाता है.

सुगंधित जड़ी बूटियों का व्यवसाय करते हैं

गंधी सरनेम वाले, सुगंधित पदार्थों, जड़ी-बूटियों से संबंधित हैं. गंध यानी सुगंध से जुड़े व्यापार यानी इतर, सुगंधित जड़ी बूटियों का व्यवसाय करते हैं. मुंबई में इस उपनाम वाले गुजराती मुस्लिम व्यापारी भी मौजूद हैं. नागदेवी/भुलेश्वर में गंधी उपनाम वाले मुस्लिम परिवारों की ओर से संचालित भारतीय दवा की दुकानें मौजूद हैं. इसे हिंदी में गंधी लेकिन अंग्रेजी में ghandy और ghandi कहा जाता है. यह आगे चल कर गांधी के रूप में भी प्रचलित हुआ. 

व्यवसायों से मिले उपनाम 

इन पुराने और भीड़भाड़ वाले व्यापारिक केंद्रो में मसालों और सुगंधित पदार्थों की गंध इन दुकानों को एक अलग पहचान दी है. गोरा गांधी, काला गांधी आदि अन्य उपनाम, गंधी या यूं कहें, घांधी उपनाम के संस्करण मौजूद हैं. गुजरात में पारसी, हिंदू और मुस्लिम व्यवसायों से मिले कई उपनाम साझा करते हैं- मिस्त्री (पर्यवेक्षक), पटेल (ग्राम प्रधान), श्रॉफ/सराफ (सुनार) नलवाला, कपाड़िया (कपड़ा व्यापारी) व्यापारी, दलाल (एजेंट), सुतार  (बढ़ई) आदि. पारसी समुदाय में भी ऐसे उपनाम लिखे जाते हैं. 

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