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RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आज यानि शुक्रवार 6 फरवरी 2026 को मौद्रिक नीति के फैसलों की घोषणा कर दी है. गवर्नर संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra) की अगुवाई वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 4 फरवरी से 6 फरवरी तक कारोबारी साल 2025–26 की छठी और आखिरी द्वैमासिक नीति बैठक आयोजित की थी. RBI गवर्नर ने कहा कि महंगाई अब भी नियंत्रित दायरे में बनी है. भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है. उन्होंने बताया कि देश में ग्रोथ मजबूत बनी हुई है. वहीं महंगाई पर भी नियंत्रण बना हुआ है.
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अध्यक्षता की. इस पैनल में इंस्टीट्यूट फॉर स्टडीज इन इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट के नागेश कुमार, अर्थशास्त्री सौगत भट्टाचार्य, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के राम सिंह, RBI की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता और RBI के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर इंद्रनील भट्टाचार्य को शामिल किया गया.
रेपो रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं
इसी को ध्यान में रखते हुए RBI ने ब्याज दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया है. मौद्रिक नीति समिति का रुख न्यूट्रल पर बरकरार रखा गया है. इस दौरान आरबीआई ने रेपो रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं किया है. ये 5.25 फीसदी पर ही रखा गया है. इसका अर्थ है कि आपके लोन की ईएमआई पर किसी तरह का असर नहीं होगा.
एमपीसी बैठक के फैसले पर अपडेट देते हुए भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा ​कि जहां ग्लोबल लेवल पर अनिश्चितता फैली हुई है. वहीं भारत में महंगाई को पूरी तरह से नियंत्रित है. महंगाई दर आरबीआई की सीमा से नीचे है. महंगाई दर 4 फीसदी के करीब बनी हुई है. इसका अर्थ है कि हमारी इंडस्ट्री और देश पर अधिक भार नहीं है.
रियल GDP ग्रोथ 7.4 फीसदी की राह पर
RBI गवर्नर ने कहा कि ग्रोथ आउटलुक के हालात पॉजिटिव बने हुए हैं. उन्होंने बताया कि FY27 की पहली तिमाही को लेकर महंगाई का अनुमान 3.9 फीसदी से बढ़ा है. यह 4 फीसदी तक पहुंच चुका है. वहींं दूसरी तिमाही के लिए महंगाई का अनुमान 4 फीसदी से बढ़कर 4.2 फीसदी तक पहुंच चुका है. गवर्नर के अनुसार, रियल GDP ग्रोथ 7.4 फीसदी की राह पर है.
एक्सपोर्ट को सहायता मिलने की उम्मीद
RBI गवर्नर ने कहा कि शहरी खपत में अब रिकवरी देखने को मिल रही है. ग्रामीण डिमांड में स्थिरता बन बनी हुई है. उन्होंने बताया कि भारत अमेरिका ट्रेड डील (India US Trade Deal) से एक्सपोर्ट को सहायता मिलने की उम्मीद है, जो मध्यम अवधि में निर्यात के लिए सहायक साबित होगी.
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