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Spinosaurus Mirabilis
सहारा रेगिस्तान जो आज रेत का विशाल समंदर माना जाता है, कभी हरे-भरे जंगलों, नदियों और झीलों से भरा हुआ करता था. यहां सदियों से कई रहस्य दफन हैं और समय-समय पर खुदाई के दौरान ये राज बाहर आते रहते हैं. अब हाल ही में अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान में मिले एक विशाल जीवाश्म ने दुनियाभर के लोगों की कल्पना को पंख दे दिए हैं. इस खोज के बाद कई लोग मानने लगे हैं कि वैज्ञानिकों को पहली बार असली ज़िंदगी का “ड्रैगन” मिल गया है.
इंसान जितनी बड़ी खोपड़ी
शोधकर्ताओं को जो खोपड़ी मिली है, वह एक वयस्क इंसान के बराबर है. इसका जबड़ा लंबा है. दांत बेहद नुकीले हैं. हर दांत इंसानी हथेली जितना बड़ा है. थूथन मगरमच्छ जैसा दिखाई देता है.
खोपड़ी की सबसे अनोखी बात है आंखों के ऊपर निकला एक बड़ा, मुड़ा हुआ सींग. सिर के पीछे नुकीले कांटे भी हैं. यही वजह है कि यह जीव प्राचीन कथाओं में बताए गए उड़ने वाले ड्रैगन जैसा लगता है.
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किसने की खोज?
यह खोज University of Chicago की टीम ने की है. वैज्ञानिकों ने इस नई प्रजाति का नाम रखा है Spinosaurus mirabilis. इसका अर्थ है “अद्भुत कांटेदार छिपकली”. यह जीव करीब 9.5 करोड़ साल पहले क्रेटेशियस काल में धरती पर रहता था. आज जहां रेत ही रेत है, वहां कभी घने जंगल और नदियां थीं. वैज्ञानिकों के अनुसार उस समय सहारा क्षेत्र में मीठे पानी की नदियां बहती थीं. यह इलाका समुद्र से सैकड़ों किलोमीटर दूर था.
‘हेल हेरॉन’ नाम का शिकारी
इस जीव को “हेल हेरॉन” भी कहा जा रहा है. इसकी लंबाई लगभग 40 फीट थी. वजन 10 से 14 टन के बीच माना जा रहा है. यह सात फीट गहरे पानी में खड़े होकर मछलियां पकड़ सकता था. यह डायनासोर स्पिनोसॉरिड परिवार से जुड़ा था. इस परिवार के जीव मगरमच्छ जैसे चेहरे और पीठ पर पाल या उभार के लिए जाने जाते हैं.
आंखों के बीच तलवार जैसा सींग
इस प्रजाति की सबसे बड़ी पहचान थी आंखों के बीच से निकलने वाला 20 इंच ऊंचा हड्डी का सींग. वैज्ञानिकों ने इसकी तुलना मुड़ी हुई तलवार, यानी “सिमिटर” से की है. खोपड़ी की बनावट सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई. कई लोगों ने कहा, “ये तो बिल्कुल ड्रैगन का सिर है.” हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि ड्रैगन सिर्फ मिथक हैं. इस रिसर्च को जर्नल Science में प्रकाशित किया गया है.
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वैज्ञानिकों की राय
इस खोज का नेतृत्व करने वाले वैज्ञानिक Paul Sereno ने कहा कि यह पल उनकी टीम के लिए बेहद भावुक था. यह खोज स्पिनोसॉरिड्स की जीवनशैली को लेकर पुराने विचारों को बदल सकती है.
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