आर्टेमिस-II मिशन के लिए NASA का सबसे शक्तिशाली रॉकेट लॉन्च पैड पर पहुंचा, 50 साल बाद चार अंतरिक्ष यात्री करेंगे चंद्रमा की परिक्रमा

नासा ने आर्टेमिस-II मिशन की तैयारियां तेज कर दी हैं. शक्तिशाली एसएलएस रॉकेट लॉन्च पैड पर पहुंच चुका है. बता दें कि यह मिशन 50 साल बाद इंसानों को लेकर चंद्रमा के पास उड़ान भरेगा.

नासा ने आर्टेमिस-II मिशन की तैयारियां तेज कर दी हैं. शक्तिशाली एसएलएस रॉकेट लॉन्च पैड पर पहुंच चुका है. बता दें कि यह मिशन 50 साल बाद इंसानों को लेकर चंद्रमा के पास उड़ान भरेगा.

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Deepak Kumar
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Photograph: (NASA)

नासा (नैशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन) ने अपने नए और बेहद शक्तिशाली चंद्रमा रॉकेट को सफलतापूर्वक लॉन्च पैड तक पहुंचा दिया है. इसके साथ ही 50 वर्षों के बाद इंसानों को लेकर चंद्रमा के आसपास उड़ान भरने की तैयारियां तेज हो गई हैं. यह मिशन नासा के महत्वाकांक्षी आर्टेमिस-II कार्यक्रम का हिस्सा है.

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NASA की ऐतिहासिक तैयारी

जानकारी के मुताबिक, 322 फीट ऊंचा स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च पैड 39B पर पहुंच चुका है. यह रॉकेट और ओरियन स्पेसक्राफ्ट को व्हीकल असेंबली बिल्डिंग से लॉन्च पैड तक लाया गया. दूरी केवल 6.4 किलोमीटर थी, लेकिन रॉकेट के विशाल आकार के कारण इसे पहुंचाने में लगभग 12 घंटे लगे. क्रॉलर-ट्रांसपोर्टर-2 के जरिए इसे 1 मील प्रति घंटे से भी कम गति से ले जाया गया.

ये 4 अंतरिक्ष यात्री करेंगे चंद्रमा की परिक्रमा

आर्टेमिस-II मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की परिक्रमा करेंगे और करीब 10 दिनों की यात्रा के बाद सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौटेंगे. इस दल में नासा के अंतरिक्ष यात्री रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडा के अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन शामिल हैं. बता दें कि इस मिशन में चंद्रमा पर लैंडिंग नहीं होगी, लेकिन यह भविष्य में चंद्रमा पर उतरने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.

कई बार टल चुका है ये मिशन

यह मिशन तकनीकी कारणों से कई बार टल चुका है. अब नासा फरवरी की शुरुआत में एक अहम फ्यूलिंग टेस्ट करेगा, जिसे “वेट ड्रेस रिहर्सल” कहा जाता है. यह अभ्यास 2 फरवरी को प्रस्तावित है, जिसमें रॉकेट में बेहद ठंडा ईंधन भरा जाएगा और पूरे लॉन्च काउंटडाउन की प्रक्रिया दोहराई जाएगी. इसके बाद ईंधन को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला जाएगा.

अगर यह मिशन सफल रहता है, तो 1972 के बाद यह पहली बार होगा जब इंसान चंद्रमा की यात्रा करेगा. आर्टेमिस-II मिशन न केवल विज्ञान के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि भविष्य में इंसानों को दोबारा चंद्रमा पर भेजने की नींव भी रखेगा.

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