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women's day 2026 Photograph: (SORA)
Women's Day 2026: तेजी से बदलती जीवनशैली, बढ़ता काम का दबाव और पर्सनल लाइफ की जिम्मेदारियां आज की कामकाजी महिलाओं की सेहत पर गहरा प्रभाव डाल रही हैं. लंबे समय तक काम करना, पर्याप्त नींद न लेना, अनियमित खानपान और तनाव जैसी वजहों से महिलाओं में लगातार थकान, हार्मोनल इंबैलेंस, पीरियड्स में गड़बड़ी और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के उपलक्ष्य पर जानिए डॉक्टरों का इस पर क्या कहना है.
कब है अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026?
हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस जिसे International Women’s Day कहते हैं मनाया जाता है. बता दें कि मार्च का पूरा महीना देश-दुनिया की महिलाओं के सम्मान और उनके योगदान के लिए मनाया जाता है. समाज, परिवार और वर्किंग वुमेन्स की भूमिका को नमन किया जाता है. इस दिन की शुरुआत साल 1909 में अमेरिका में सोशलिस्ट पार्टी द्वारा महिला दिवस के रूप में हुई थी. इसके बाद से हर वर्ष इसे मनाया जाने लगा.
क्यों बढ़ रही है कामकाजी महिलाओं में थकान?
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, आज की महिलाएं घर और ऑफिस दोनों की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं. ऐसे में उन्हें अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता है. देर रात तक काम करना, सुबह जल्दी उठना और दिनभर मानसिक दबाव में रहने से उनके शरीर की ऊर्जा कम हो जाती है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
नर्चर में स्त्री रोग विशेषज्ञ और आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. अर्चना धवन बजाज बताती हैं कि लगातार तनाव, नींद की कमी और खराब डाइट महिलाओं के हार्मोनल सिस्टम को प्रभावित करती हैं. इससे थकान, चिड़चिड़ापन, पीरियड्स में अनियमितता और वजन बढ़ने जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं. कई मामलों में यह PCOS और थायरॉयड जैसी बीमारियों का कारण भी बन जाती है.
हार्मोनल असंतुलन के संकेत
महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन कई तरह से दिखाई दे सकता है. इसके शुरुआती संकेतों को पहचानना जरूरी है.
- लगातार थकान महसूस होना
- पीरियड्स का अनियमित होना
- अचानक वजन बढ़ना या घटना
- बाल झड़ना या त्वचा पर पिंपल्स बढ़ना
- नींद न आना और मूड स्विंग्स
- काम में ध्यान न लगना
अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
तनाव और लाइफस्टाइल भी बड़ा कारण
विशेषज्ञ बताते हैं कि लंबे समय तक स्क्रीन के सामने काम करना, शारीरिक गतिविधि की कमी और जंक फूड का अधिक सेवन भी महिलाओं के हार्मोनल स्वास्थ्य को प्रभावित करता है. खासकर 25 से 40 साल की उम्र की कामकाजी महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जा रही है.
क्यों होता है हार्मोनल इंबैलेंस?
डॉक्टर के अनुसार, हार्मोनल असंतुलन केवल किसी बीमारी की वजह से नहीं होता बल्कि जीवनशैली इसका सबसे बड़ा कारण है. अगर महिलाएं समय पर खाना खाएं, पर्याप्त नींद लें और नियमित रूप से व्यायाम करें तो इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.
कैसे करें बचाव?
डॉक्टरों के अनुसार कुछ सरल आदतें अपनाकर महिलाएं अपनी हार्मोनल हेल्थ को बेहतर बनाए रख सकती हैं. जैसे कि-
- रोजाना कम से कम 7-8 घंटे की नींद लें
- संतुलित और पौष्टिक डाइट का सेवन करें
- नियमित रूप से योग या एक्सरसाइज करें
- तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन करें
- जंक फूड और अत्यधिक कैफीन से बचें
- समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराएं
काम और सेहत के बीच संतुलन जरूरी
हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि आज की महिलाओं के लिए वर्क-लाइफ बैलेंस बनाए रखना बेहद जरूरी है. काम के साथ-साथ अपनी शारीरिक और मानसिक सेहत पर ध्यान देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
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