आपको भी पहाड़ों में सफर के वक्त होती है पेट की समस्या? एक्सपर्ट से जानिए इसके पीछे का कारण

पहाड़ों पर जाने पर मोशन सिकनेस की समस्या हो जाती है. पहाड़ी इलाकों में सफर के दौरान लोगों को उल्टी रोकने की हर मुमकिन कोशिश के बावजूद उल्टी आ ही जाती है.आखिर ऐसा क्यों होता है चलिए एक्सपर्ट से जानते हैं.

पहाड़ों पर जाने पर मोशन सिकनेस की समस्या हो जाती है. पहाड़ी इलाकों में सफर के दौरान लोगों को उल्टी रोकने की हर मुमकिन कोशिश के बावजूद उल्टी आ ही जाती है.आखिर ऐसा क्यों होता है चलिए एक्सपर्ट से जानते हैं.

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Akansha Thakur
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stomach care tips for hill trips

Stomach Care Tips For Hill Trips

Stomach Care Tips For Hill Trips: नए साल पर बहुत से लोग पहाड़ों पर घूमने गए थे. कोई मनाली, कोई शिमला, तो कोई मसूरी गया था. बर्फ से ढकी पहाड़ियां, ठंडी हवा और सुकून भरा माहौल हर किसी को अपनी ओर खींच लाता है, लेकिन जितनी खूबसूरत ये जगहें होती हैं उतनी ही परेशानियां भी साथ लेकर आती हैं. अक्सर आपने देखा होगा कि जैसे ही लोग ऊंचाई वाली जगहों पर जाते हैं उनका या तो पेट गड़बड़ होने लगता है या फिर गैस बनने लहती है, या पेट फूल जाता है या उलझन जैसी दिक्कत होने लगती है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर पहाड़ों पर जाते ही पेट क्यों खराब हो जाता है. क्या यह सिर्फ ठंड या बाहर का खाना खाने की वजह से होता है या इसके पीछे कोई और ही कारण है. आइए जानते हैं कि ज्यादा ऊंचाई पर पेट क्यों बिगड़ता है और इससे कैसे बचा जा सकता है? 

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट? 

एक्सपर्ट बताते हैं कि पहाड़ों पर पेट की समस्या की सबसे बड़ी है हाइपोक्सिया यानी शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिल पाना. जैसे-जैसे हम समुद्र तल से ऊपर जाते हैं. हवा में ऑक्सीजन की मात्रा कम होती जाती है. इसका असर सिर्फ हमारी सांसों पर नहीं बल्कि पूरे शरीर पर पड़ता है. खासतौर पर नर्वस सिस्टम और पाचन तंत्र पर. हमारे शरीर में एक खास नर्व होती है जिसे वेगर्स नर्व कहा जाता है. 

क्या है वेगर्स नर्व? 

यह नर्व हमारे पाचन तंत्र को कंट्रोल करती है यानी आंतों की मूवमेंट, खाना पचाने वाले एंजाइम्स का रिलीज, पेट का सही समय पर खाली होना ये सब काम वेगस नर्व की मदद से होते हैं. लेकिन जब हम ज्यादा ऊंचाई पर जाते हैं और शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, तो वेगस नर्व ठीक से काम नहीं कर पाती है. इसका नतीजा यह होता है कि पाचन धीमा हो जाता है, जिसकी वजह से भारीपन और बेचैनी महसूस होती है. 

स्टडी में हुआ खुलासा

हाल ही में हुए एक स्टडी में सामने आया है कि जब हमारे शरीर में हाइपोक्सिया GI मोटिलिटी यानी आंतों की गति को धीमा कर देता है. जब खाना आंतों में धीरे-धीरे आगे बढ़ता है तो वह ज्यादा देर तक पेट में जमा रहता है. इससे खाना फर्मेंट होने लगता है और ज्यादा गैस बनने लगती है. यही कारण है कि ऊंचाई पर लोगों को अक्सर ब्लोटिंग और गैस की शिकायत होती है. 

ऊंचाई वाली जगहों पर ठंड के कारण शरीर का सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम एक्टिव हो जाता है, जिसे आम भाषा में फाइट या फ्लाइट मोड कहा जाता है. इस मोड में शरीर का ध्यान एनर्जी बचाने पर होता है, न कि पाचन पर, इसका असर यह होता है कि पाचन और धीमा हो जाता है, भूख कम लगने लगती है, पेट भारी और सुस्त महसूस होता है. 

सफर से पहले पेट को कैसे करें तैयार?

अगर आप पहाड़ों पर सफर करने जा रहे हैं तो ज्यादा ताल भुना या मसालेदार खाना न खाएं, हल्का और आसानी से पचने वाला खाना लें. पर्याप्त पानी पिएं. डिहाइड्रेशन से बचें, फाइबर और प्रोबायोटिक फूड्स को अपनी डाइट में शामिल करें. यात्रा के दौरान छोटे-छोटे मील लें और ओवरईटिंग से बचें. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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