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अब मां-बाप की बच्चों को लेकर कुछ टेंशन कम हो गई है. अब उन्हें फिक्र नहीं है कि बच्चे सूसू या फिर पॉटी कर देंगे तो कपड़े गंदे हो जाएंगे या फिर बच्चों की साफ-सफाई के लिए टॉयलेट ढूंढना पड़ेगा. इसी के चक्कर में बहुत सारे मां-बाप अपने बच्चों को 3 से 4 साल या उससे ज्यादा उम्र तक भी डायपर पहनाते रहते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बच्चों को किस उम्र तक ही डायपर पहनाने चाहिए और किस उम्र में उन्हें डायपर पहनाना बंद कर देना चाहिए. आइए आपको बताते हैं.
बच्चों का सूसू और पॉटी बंद
इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की गाइडलाइंस फॉर डेंटल केयर डायपर्स एंड क्लोदिंग के मुताबिक भारत में बहुत जगह ऐसी है जहां बिना दबाव के टॉयलेट ट्रेनिंग शिशुपन से ही देनी शुरू कर दी जाती है. जिसमें समय से बच्चों को सूसू और पॉटी कराने के मैथड और बार-बार कोशिश करने की वजह से यहां बच्चे कभी डायपर नहीं पहनते हैं. जिसका फायदा छोटे बच्चों की सेहत पर पड़ता है और वो फंगल इंफेक्शन और यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन से बच जाते हैं. इसके साथ ही इससे हर महीने डायपर में खर्च होने वाले पैसों की भी बचत होती है.
18 से 24 महीने की उम्र में सिखाएं
कई लोग सलाह देते हैं कि बच्चों को 18 से 24 महीने की उम्र में पॉटी, सूसू को लेकर सिखाना चाहिए. यही वो उम्र होती है जब बच्चे रात में ज्यादा देर तक ड्राई रहते हैं और दिन में गीला करते हैं. ऐसे में जब आपका बच्चा टॉयलेट ट्रेंड हो जाए तो आप उसको रात में डायपर पहनाना बंद कर सकते हैं और सोने से पहले टॉयलेट जाना सिखाएं.
इस उम्र में कर दें बंद
वहीं बहुत सारे लोग करीब 3 साल की उम्र तक बच्चों को डायपर पहनाते रहते हैं और बच्चे उसी में सूसू-पॉटी कर लेते हैं. इस उम्र तक बच्चे इन चीजों के बारे में बता नहीं पाते हैं. इसके बाद 3-4 साल की उम्र में वे बच्चों को डायपर पहनाना बंद करते हैं. ऐसे में गाइडलाइंस के अनुसार देखें तो बच्चे को शुरू से ही टॉयलेट ट्रेनिंग देना ज्यादा अच्छा है. सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही डायपर्स पहनाएं. वहीं अगर पहना भी रहे हैं तो डेढ़ से 2 साल की उम्र तक डायपर लगाना बंद कर दें.
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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित हैं. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.