पिज्जा पर पाइनएप्पल नहीं! सेहत पर मंडरा रहा इस खतरनाक केमिकल का खतरा, ब्रिटेन सरकार ने दी चेतावनी

हाल ही में ब्रिटेन सरकार ने खाने की पैकेजिंग, पानी और बर्तनों में पाए जाने वाले PFAS यानी ‘फॉरएवर केमिकल्स’ को लेकर नई योजना बनाई है. चलिए जानते हैं सेहत पर इनके असर और सरकार के कदम.

हाल ही में ब्रिटेन सरकार ने खाने की पैकेजिंग, पानी और बर्तनों में पाए जाने वाले PFAS यानी ‘फॉरएवर केमिकल्स’ को लेकर नई योजना बनाई है. चलिए जानते हैं सेहत पर इनके असर और सरकार के कदम.

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Akansha Thakur
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PFAS chemicals

PFAS chemicals

लोग हमेशा पाइनएप्पल को पिज्जा पर सबसे खराब टॉपिंग मानते हैं, लेकिन अब पता चला कि PFAS यानी (Per and polyfluoroalkyl substances) नाम के "फॉरएवर केमिकल्स" उससे कहीं ज्यादा खतरनाक हैं. ये सैकड़ों साल तक पर्यावरण और शरीर में रहते हैं.  ये केमिकल पिज्जा बॉक्स, फूड पैकेजिंग, नॉन-स्टिक बर्तनों, फायरफाइटिंग फोम में इस्तेमाल होते हैं और पानी, खाने के जरिए शरीर में पहुंचते हैं. ऐसे में चलिए हम आपको बताते हैं कि आखिर क्या है फॉरएवर केमिकल्स और इससे सेहत पर क्या असर पड़ता है? 

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क्या हैं ‘फॉरएवर केमिकल्स’?

पाइनएप्पल को लेकर पिज्जा पर बहस तो चलती रहती है. लेकिन असली चिंता अब कुछ और है. वैज्ञानिकों के अनुसार PFAS यानी Per और Polyfluoroalkyl Substances लंबे समय तक शरीर और पर्यावरण में बने रहते हैं. इसी वजह से इन्हें “फॉरएवर केमिकल्स” कहा जाता है. ये रसायन खाने की पैकेजिंग, पिज्जा बॉक्स, नॉन-स्टिक बर्तन और पीने के पानी तक में मिल सकते हैं.

सेहत पर क्या असर पड़ता है?

रिसर्च बताती है कि PFAS से कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. इनमें लीवर से जुड़ी दिक्कतें शामिल हैं. कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है. इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है. नवजात बच्चों का वजन कम हो सकता है. कुछ मामलों में कैंसर का जोखिम भी बताया गया है.

ब्रिटेन सरकार की नई योजना

ब्रिटेन सरकार ने पहली बार इन रसायनों से निपटने के लिए एक राष्ट्रीय प्लान पेश किया है. इस योजना का मकसद यह समझना है कि ये केमिकल्स कहां से आते हैं. ये कैसे फैलते हैं. और लोगों की एक्सपोजर को कैसे कम किया जाए. सरकार इस साल के अंत तक पानी में PFAS की कानूनी सीमा तय करने पर भी सलाह करेगी.

पानी और पैकेजिंग पर सरकार की नजर

वैज्ञानिकों का कहना है कि ब्रिटेन का पीने का पानी दुनिय के सबसे अच्छे स्तर पर है, लेकिन कानूनी सीमा तय होने से नियम तोड़ने वाली कंपनियों पर कार्रवाई आसान हो जाएगी. सरकार खाने की पैकेजिंग की भी जांच करेगी. इसमें माइक्रोवेव पॉपकॉर्न बैग और पिज्जा बॉक्स जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं. लोगों को जागरूक करने के लिए एक खास वेवसाईट भी शुरू की जाएगी. 

रिसर्च में हुआ खुलासा 

हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर कुछ नहीं किया गया, तो 2050 तक इन केमिकल्स की वजह से ब्रिटेन को करीब 1.4 ट्रिलियन पाउंड का नुकसान हो सकता है.हर साल स्वास्थ्य से जुड़ा खर्च पहले ही अरबों पाउंड में पहुंच चुका है.

इन देशों में PFAS पर बैन लगाने की चर्चा तेज

यूरोपियन यूनियन में भी PFAS पर बैन लगाने की चर्चा तेज है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे लंबे समय में अरबों की बचत हो सकती है. अमेरिका के कुछ राज्यों ने 2025 से इन रसायनों पर रोक लगाने की तैयारी कर ली है. अन्य राज्य भी इसी रास्ते पर हैं.

पर्यावरण मंत्री एम्मा हार्डी ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों की सेहत और प्रकृति की सुरक्षा सबसे जरूरी है. सरकार उद्योग और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर काम करेगी, ताकि ये “फॉरएवर केमिकल्स” हमेशा की समस्या न बनें.

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