इंफेक्शन से फेल हो गए थे Lungs, फिर भी 48 घंटे तक जिंदा रहा मरीज! डॉक्टरों की अनोखी तकनीक से बची जान

अमेरिका में 33 साल के युवक ने 48 घंटे बिना फेफड़ों के आर्टिफिशियल लंग सिस्टम की मदद से जीवन पाया. चलिए आपको इस मेडिकल चमत्कार की पूरी कहानी और लंग ट्रांसप्लांट की सफलता के बारे में बताते हैं.

अमेरिका में 33 साल के युवक ने 48 घंटे बिना फेफड़ों के आर्टिफिशियल लंग सिस्टम की मदद से जीवन पाया. चलिए आपको इस मेडिकल चमत्कार की पूरी कहानी और लंग ट्रांसप्लांट की सफलता के बारे में बताते हैं.

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Akansha Thakur
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Medical Miracle

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अमेरिका में डॉक्टरों ने एक ऐसा इलाज किया है जिसे आधुनिक चिकित्सा का बड़ा चमत्कार माना जा रहा है. 33 साल के एक युवक को इन्फ्लूएंजा और एक ड्रग-रेजिस्टेंट बैक्टीरियल संक्रमण के कारण गंभीर लंग फेलियर हो गया था. उसकी हालत इतनी नाजुक हो गई थी कि सामान्य इलाज से उसे बचाना संभव नहीं लग रहा था. ऐसे में डॉक्टरों ने एक ऐसा फैसला लिया जिसकी वजह से उस मरीज की जान बच गई.  

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गंभीर हालत में लिया गया बड़ा फैसला

युवक के दोनों फेफड़े पूरी तरह खराब हो चुके थे. वे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं दे पा रहे थे. इससे उसके दिल, किडनी और ब्लड प्रेशर पर भी असर पड़ने लगा था. डॉक्टरों की टीम ने जांच के बाद तय किया कि संक्रमित फेफड़ों को हटाना ही एकमात्र रास्ता है. यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि बिना फेफड़ों के इंसान का जिंदा रहना लगभग असंभव माना जाता है.

आर्टिफिशियल लंग सिस्टम बना सहारा

डॉक्टरों ने युवक को एक खास तरह के कस्टम एक्सटर्नल आर्टिफिशियल लंग सिस्टम से जोड़ा. यह सिस्टम शरीर के बाहर लगाया गया था. इसका काम खून को ऑक्सीजन देना और दिल में सामान्य ब्लड फ्लो बनाए रखना था. मशीन ने वही काम किया जो आमतौर पर फेफड़े करते हैं. इससे शरीर के दूसरे अंगों को जरूरी ऑक्सीजन मिलती रही.

48 घंटे बिना फेफड़ों के जिंदा रहा इंसान

इस सिस्टम की मदद से युवक 48 घंटे तक बिना फेफड़ों के जिंदा रहा. यह समय डॉक्टरों के लिए भी बड़ी चुनौती से कम नहीं था, लगातार उसकी निगरानी की गई. इस दौरान उसके दिल की धड़कन, ब्लड प्रेशर और किडनी की स्थिति में सुधार देखा गया. शरीर धीरे-धीरे स्थिर होने लगा. यह संकेत था कि इलाज सही दिशा में जा रहा है.

मेडिकल साइंस के लिए बड़ी उपलब्धि 

इन 48 घंटों के बाद युवक को लंग ट्रांसप्लांट के लिए तैयार किया गया. डॉक्टरों ने नए फेफड़े लगाए और शरीर ने उन्हें स्वीकार करना शुरू कर दिया. यह पूरी प्रक्रिया मेडिकल साइंस के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस तकनीक से भविष्य में गंभीर लंग फेलियर के मरीजों को नई उम्मीद मिल सकती है.

यह मामला सिर्फ एक मरीज की जान बचाने तक सीमित नहीं है. यह दिखाता है कि आधुनिक तकनीक और डॉक्टरों की मेहनत से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है. यह कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं और नई जिंदगी की उम्मीद कर रहे हैं.

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