Holi 2026: अनोखा गांव, जहां 150 साल से नहीं खेली गई है होली, जानिए क्या है इसके पीछे की कहानी?

Holi 2026: होली का त्योहार हर किसी को पसंद होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा गांव भी है जहां पर पिछले 150 सालों से न तो होली खेली जाती है और न ही होलिका दहन होता है. लोग ना कही रंग उड़ाते हैं और ना ही ढोल की आवाज सुनाई देती है.

Holi 2026: होली का त्योहार हर किसी को पसंद होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा गांव भी है जहां पर पिछले 150 सालों से न तो होली खेली जाती है और न ही होलिका दहन होता है. लोग ना कही रंग उड़ाते हैं और ना ही ढोल की आवाज सुनाई देती है.

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Akansha Thakur
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Holi 2026 (16)

Holi 2026

Holi 2026: भारत में होली का नाम लेते ही रंगों, गुलाल और खुशियों की तस्वीर सामने आ जाती है. फाल्गुन का महीना आते ही हर तरफ उत्सव का माहौल बन जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा गांव भी है, जहां होली मनाना पूरी तरह वर्जित है? 

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यह अनोखा गांव है खरहरी गांव, जो झांसी जिला में स्थित है. यहां पिछले करीब 150 सालों से न तो होली खेली जाती है और न ही होलिका दहन होता है. आइए जानते हैं इसके पीछे की पूरी कहानी.

क्या है 150 साल पुरानी घटना?

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, करीब डेढ़ सौ साल पहले होली के दिन गांव में एक बड़ा हादसा हुआ था. होलिका दहन के दौरान आग अचानक फैल गई. इस आग की चपेट में कई घर आ गए. गांव को भारी नुकसान झेलना पड़ा. इस हादसे के कुछ समय बाद गांव के एक प्रतिष्ठित परिवार में अचानक मौत हो गई. गांव वालों ने इन घटनाओं को अशुभ माना. इसके बाद पंचायत ने सामूहिक फैसला लिया कि भविष्य में गांव की सीमा के अंदर कभी भी होली नहीं मनाई जाएगी.

होलिका दहन पर पूरी तरह रोक

जहां देशभर में होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है, वहीं खरहरी गांव में यह परंपरा पूरी तरह बंद है. न लकड़ियां इकट्ठा की जाती हैं. न कोई धार्मिक आयोजन होता है. गांव उस दिन बिल्कुल सामान्य रहता है.

फिर त्योहार कैसे मनाते हैं लोग?

गांव के लोग इस परंपरा का सम्मान करते हैं. कुछ साल पहले गांव में इस परंपरा को तोड़ने की कोशिश की गई थी. उसी दौरान गांव में बीमारी फैलने की बातें सामने आईं. इसके बाद लोगों का विश्वास और भी मजबूत हो गया कि यह नियम गांव की सुरक्षा से जुड़ा है.

खरहरी गांव आज भी अपनी 150 साल पुरानी परंपरा को पूरी आस्था के साथ निभा रहा है. यह गांव दिखाता है कि भारत में त्योहार सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि विश्वास और इतिहास से भी जुड़े होते हैं.

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