क्या है 'एनर्जी शिफ्ट'? जिसकी फरवरी 2026 में सोशल मीडिया पर हो रही चर्चा, लोगों को महसूस हो रहे ये लक्षण

फरवरी 2026 में Schumann Resonance में अजीब स्पाइक्स, सोलर फ्लेयर्स और जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म्स से जुड़ा असर दिखाई दे रहा है. चलिए जानते हैं लोग सोशल मीडिया पर ब्रेन फॉग, नींद की समस्या और ‘एनर्जी शिफ्ट’ की बात क्यों कर रहे हैं.

फरवरी 2026 में Schumann Resonance में अजीब स्पाइक्स, सोलर फ्लेयर्स और जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म्स से जुड़ा असर दिखाई दे रहा है. चलिए जानते हैं लोग सोशल मीडिया पर ब्रेन फॉग, नींद की समस्या और ‘एनर्जी शिफ्ट’ की बात क्यों कर रहे हैं.

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Akansha Thakur
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Schumann Resonance 2026

Schumann Resonance 2026 (AI Image)

फरवरी 2026 में धरती की प्राकृतिक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फ्रीक्वेंसी, जिसे Schumann Resonance कहा जाता है, उसमें कुछ असामान्य गतिविधियां दर्ज की गई हैं. यह फ्रीक्वेंसी सामान्य तौर पर 7.83 हर्ट्ज मानी जाती है और यह मुख्य रूप से धरती और आयनमंडल के बीच बिजली गिरने से बनती है. इस बार इसमें अचानक तेज स्पाइक्स देखे गए, जिसने वैज्ञानिकों के साथ-साथ आम लोगों का भी ध्यान खींचा है.

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क्या है एनर्जी शिफ्ट? 

Schumann Resonance यानी एनर्जी शिफ्ट पृथ्वी के वायुमंडल में होने वाली प्राकृतिक विद्युत चुम्बकीय तरंगों का एक समूह है जिसे अक्शर पृथ्वी की धड़कन कहा जाता है. यह मुख्य रूप से बिजली के कड़कने से उत्पन्न होती है और लगभग 7.83 हर्ट्ज (Hz) की मूलभूत आवृत्ति पर पृथ्वी की सतह और आयनमंडल के बीच गूंजती है

विशेषज्ञों के अनुसार, इन स्पाइक्स का संबंध हाल के सोलर फ्लेयर्स और जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म्स से हो सकता है. जब सूर्य से निकलने वाली ऊर्जा धरती के मैग्नेटिक फील्ड से टकराती है, तो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वातावरण में अस्थायी बदलाव आ सकते हैं. यही बदलाव Schumann Resonance में उतार-चढ़ाव की वजह बनते हैं.

लोगों को महसूस हो रहे ये लक्षण 

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सोशल मीडिया पर कई लोग अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा कर रहे हैं. कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें कानों में तेज हाई-पिच रिंगिंग सुनाई दे रही है, जो टिनिटस जैसी लगती है. वहीं कई यूज़र्स ब्रेन फॉग, ध्यान लगाने में दिक्कत, नींद न आना और लगातार थकान महसूस करने की बात कह रहे हैं. कुछ मामलों में चिड़चिड़ापन और अचानक मूड बदलने की शिकायतें भी सामने आई हैं.

इंसानी ब्रेन वेव्स से है मिलते-जुलते 

इन अनुभवों को लेकर एक दिलचस्प पहलू यह है कि Schumann Resonance के ये स्पाइक्स इंसानी ब्रेन वेव्स से मिलते-जुलते बताए जा रहे हैं. खासतौर पर थीटा वेव्स, जिनकी फ्रीक्वेंसी 4 से 8 हर्ट्ज के बीच होती है. यही वजह है कि कुछ लोग मान रहे हैं कि धरती की बदली हुई फ्रीक्वेंसी मानव मस्तिष्क पर असर डाल सकती है.

हालांकि, वैज्ञानिक समुदाय इस विषय पर सतर्क रुख अपनाए हुए है. विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक ऐसे ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं, जो सीधे तौर पर इन शारीरिक या मानसिक लक्षणों को Schumann Resonance से जोड़ सकें. कई लक्षण तनाव, नींद की कमी और डिजिटल ओवरलोड की वजह से भी हो सकते हैं.

सोशल मीडिया पर हो रही एनर्जी शिफ्ट की चर्चा 

इसके बावजूद सोशल मीडिया पर इसे ‘एनर्जी शिफ्ट’ का नाम दिया जा रहा है. लोग मान रहे हैं कि धरती किसी बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है. फिलहाल वैज्ञानिक इस डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं और आने वाले समय में इस पर और स्पष्ट जानकारी सामने आने की उम्मीद है.

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