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Sperm Donation
डेनमार्क, जिसे दुनिया के सबसे खुशहाल और खूबसूरत देशों में गिना जाता है, अब एक अलग वजह से चर्चा में है. यह देश स्पर्म डोनेशन के मामले में भी सबसे आगे है. डेनमार्क में हर 100 बच्चों में से एक बच्चा स्पर्म डोनेशन से पैदा होता है. हालांकि, इस इंडस्ट्री के कुछ सियाह पहलू भी सामने आए हैं. हाल ही में एक डोनर के कारण विवाद खड़ा हो गया.
डेनमार्क में होती है स्पर्म की सप्लाई
डेनमार्क कई देशों में स्पर्म सप्लाई करता है. दुनियाभर की महिलाएं अक्सर गोरे, नीली आंखों वाले डोनर की तलाश करती हैं। डेनमार्क की स्पर्म इंडस्ट्री इसका फायदा उठाती है और इसे 'वाइकिंग स्पर्म' के नाम से निर्यात करती है. इसका मकसद खूबसूरत और स्वस्थ बच्चे (वाइकिंग बेबी) पैदा करना है. लेकिन इस उद्योग का काला सच तब सामने आया, जब एक डोनर 197 बच्चों का जैविक पिता निकला, जिनमें एक जानलेवा कैंसर से जुड़ा जेनेटिक म्यूटेशन पाया गया.
कैसे होते हैं वाइकिंग बेबी?
वाइकिंग बेबी का मतलब वाइकिंग युग 8वीं से 11वीं शताब्दी के बच्चे या आधुनिक संदर्भ में डेनमार्क से स्पर्म डोनेशन के जरिए पैदा हुआ बच्चे हो सकते हैं, जिनमें एक जेनेटिक उत्परिवर्तन पाया गया है जिससे उन्हें कैंसर का खतरा है और यह वाइकिंग बेबी शब्द स्पर्म डोनर के कारण चर्चा मं है जो अपनी पहचाना छुपाता है. पहले वाइकिंग बच्चों का जीवन कठिन था जहां वे खेल-खेल में बड़े होकर योद्धा बनते और परिवार की मदद करते थे और उनके नाम पूर्वजों के नाम पर रखे जाते थे.
रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
एक हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि यह डोनर 2005 में डोनेशन शुरू कर 17 साल तक जारी रखा. 14 देशों की 67 क्लीनिकों के जरिए 197 बच्चों को जन्म दिया. इन बच्चों में कैंसर से जुड़ा म्यूटेशन पाया गया. कुछ बच्चों की मौत भी हो चुकी है. रिपोर्ट ने इस उद्योग की निगरानी और रेगुलेशन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
यूरोप और डेनमार्क का स्पर्म बाजार
यूरोप में स्पर्म डोनेशन का बाजार लगभग 1.3 अरब यूरो का है. 2033 तक इसे 2.3 अरब यूरो तक बढ़ने की उम्मीद है. डेनमार्क दुनिया का सबसे बड़ा स्पर्म एक्सपोर्टर है. यहां स्थित क्रायोस इंटरनेशनल दुनिया का सबसे बड़ा स्पर्म बैंक है.
100 से ज्यादा देशों में स्पर्म का निर्यात
यूरोप के स्पर्म डोनेशन बाजार को करीब 1.3 अरब यूरो का है, जिसके 2033 तक 2.3 अरब यूरो का हो जाने की उम्मीद है. वहीं डेनमार्क दुनिया का सबसे बड़ा स्पर्म एक्सपोर्टर है. डेनमार्क स्थित क्रायोस इंटरनेशनल दुनिया का सबसे बड़ा स्पर्म बैंक है. यहां से 100 से ज्यादा देशों में स्पर्म एक्सपोर्ट होता है. स्पर्म की एक छोटी सी शीशी (आधा मिलीलीटर) की कीमत 100 से 1,000 यूरो तक होती है.
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