क्या मौत के बाद भी जिंदा रहती है चेतना? नई रिसर्च ने बदल दी वैज्ञानिक सोच

नई रिसर्च में दावा किया गया है कि मौत के बाद भी चेतना कुछ समय तक बनी रह सकती है. वैज्ञानिकों का कहना है कि मौत एक प्रक्रिया है, न कि तुरंत खत्म होने वाली घटना.

नई रिसर्च में दावा किया गया है कि मौत के बाद भी चेतना कुछ समय तक बनी रह सकती है. वैज्ञानिकों का कहना है कि मौत एक प्रक्रिया है, न कि तुरंत खत्म होने वाली घटना.

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Akansha Thakur
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Consciousness After Death

Consciousness After Death

अब तक माना जाता रहा है कि मौत का मतलब है दिमाग और दिल का हमेशा के लिए बंद हो जाना. लेकिन हाल ही में हुए एक नई रिसर्च इस सोच को चुनौती दे रही है. वैज्ञानिकों का कहना है कि चेतना यानी Consciousness, मौत के बाद भी कुछ समय तक मौजूद रह सकती है.

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कई अध्ययनों में सामने आए चौंकाने वाले नतीजे

Arizona State University की शोधकर्ता अन्ना फाउलर ने दर्जनों वैज्ञानिक अध्ययनों की समीक्षा की. इनमें Near Death Experience, हार्ट अटैक के दौरान चेतना और मरते समय दिमाग की गतिविधियों पर रिसर्च शामिल थी.

20% मरीजों को याद रहा ‘मौत का वक्त’

रिसर्च में सामने आया कि हार्ट अटैक से बचने वाले करीब 20 फीसदी लोगों को उस समय की घटनाएं याद थीं, जब उनका दिमाग काम करना बंद कर चुका था. कुछ मरीजों ने बताया कि दिल रुकने के बावजूद वे आसपास की बातें समझ पा रहे थे।

वैज्ञानिकों ने इंसानों और जानवरों में रिकॉर्ड किया कि मरते समय दिमाग की गतिविधि अचानक सामान्य जागने की स्थिति से भी ज्यादा तेज हो जाती है.
कुछ मामलों में तो दिल रुकने के बाद भी न्यूरॉन्स सक्रिय पाए गए.

90 मिनट बाद तक भी चल सकती है दिमाग में हलचल 

अन्ना फाउलर ने बताया कि कुछ स्टडीज में देखा गया है कि मौत घोषित होने के 90 मिनट बाद तक भी दिमाग में हलचल बनी रहती है. उन्होंने यह बात American Association for the Advancement of Science की एक कॉन्फ्रेंस में कही. फाउलर के मुताबिक मौत कोई एक सेकंड की घटना नहीं है. यह मिनटों और घंटों में होने वाली प्रक्रिया है. उन्होंने कहा कि जैविक मौत तुरंत अपरिवर्तनीय नहीं होती.

ऑर्गन डोनेशन और CPR पर पड़ेगा असर

इस रिसर्च का असर ऑर्गन डोनेशन के समय और CPR की समय सीमा पर भी पड़ सकता है. अगर दिमाग देर तक सक्रिय रहता है, तो इलाज और पुनर्जीवन की संभावनाएं बढ़ सकती हैं. 

क्या कहते हैं डॉक्टर? 

इस हफ्ते डॉ. सैम पार्निया ने भी चौंकाने वाला खुलासा किया. वे NYU Langone School of Medicine में क्रिटिकल केयर रिसर्च के डायरेक्टर हैं. उन्होंने बताया कि कुछ मरीजों ने कहा कि उन्होंने अपनी मौत की घोषणा तक सुनी थी. 2023 की उनकी स्टडी में CPR के दौरान एक घंटे तक दिमाग की उच्च स्तरीय तरंगें दर्ज की गईं.

सोच, याददाश्त और चेतना बनी रहती है

इन ब्रेन वेव्स का संबंध सोचने, याद रखने और जागरूकता से था. इससे यह संकेत मिलता है कि दिल रुकने के बाद भी चेतना पूरी तरह खत्म नहीं होती. शोधकर्ताओं का मानना है कि मौत को अब एक स्थिर सीमा नहीं, बल्कि एक बदलती प्रक्रिया के रूप में देखना चाहिए. यह रिसर्च चिकित्सा, नैतिकता और दर्शन तीनों क्षेत्रों में नई बहस छेड़ रही है.

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