वैज्ञानिकों ने AI की मदद से बनाया नया वायरस, इस खतरनाक बैक्टीरिया से लड़ने में करेगा मदद, जानिए कैसे

वैज्ञानिकों ने AI टूल Evo2 का इस्तेमाल करके एक नया वायरस बनाया है, जो पहले कभी प्रकृति में नहीं था. यह वायरस बैक्टीरिया को मारने के लिए डिजाइन किया गया है और यह प्राकृतिक वायरस से 25% तेज काम करता है.

वैज्ञानिकों ने AI टूल Evo2 का इस्तेमाल करके एक नया वायरस बनाया है, जो पहले कभी प्रकृति में नहीं था. यह वायरस बैक्टीरिया को मारने के लिए डिजाइन किया गया है और यह प्राकृतिक वायरस से 25% तेज काम करता है.

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Akansha Thakur
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AI Viruses

AI Virus Creation

AI Virus Creation: वैज्ञानिकों ने AI तकनीक का इस्तेमाल करके एक बिल्कुल नया वायरस बनाया है जिसका नाम Evo–Φ2147 है. यह वायरस पहले कभी प्रकृति में मौजूद नहीं था. इसे खासतौर पर खतरनाक E. Coli बैक्टीरिया को मारने के लिए डिजाइन किया गया है. नया वायरस प्राकृतिक वायरस की तुलना में 25% तेजी से काम करता है और बैक्टीरिया से लड़ने की नई संभावनाएं खोलता है.

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कैसे बनाया गया यह वायरस?

ब्रिटेन की स्टार्टअप कंपनी Genyro के वैज्ञानिकों ने AI टूल Evo2 और DNA निर्माण तकनीक Sidewinder का इस्तेमाल किया. Evo2 को 9 ट्रिलियन बेस पेयर के डेटा पर जांच किया गया, ताकि यह पूरी तरह नए जीवाणु कोड तैयार कर सके. Sidewinder तकनीक ने जीनों को सही क्रम में जोड़ने का काम आसान और सटीक बनाया.

क्या है वायरस की खासियत? 

Evo–Φ2147 में केवल 11 जीन हैं, जबकि मानव जीनोम में 2,00,000 से ज्यादा जीन होते हैं. यह वायरस अपने आप प्रजनन नहीं कर सकता, इसलिए इसे कुछ विशेषज्ञ जीवित नहीं मानते.इस वायरस का उद्देश्य एंटीबायोटिक रेसिस्टेंट बैक्टीरिया को मारना और नए वैक्सीन विकसित करने में मदद करना है. 

वैज्ञानिकों का मानना है कि AI और जीन निर्माण तकनीक के जरिए आने वाले समय में पूरी तरह नए जीव बनाए जा सकते हैं या लंबे समय से विलुप्त प्रजातियों को पुनर्जीवित किया जा सकता है. वैज्ञानिक के अनुसार, AI अब प्राकृतिक विकास का सह-लेखक बन गया है और यह जैविक विकास को नई दिशा दे सकता है.

सुरक्षा और सावधानियां

AI से डिजाइन किए गए जीवों के खतरे को देखते हुए, Evo2 को इस तरह जांच किया गया है कि यह इंसानी रोगजनकों को उत्पन्न न कर सके. अनुसंधानकर्ताओं ने यह सुनिश्चित किया कि वायरस केवल बैक्टीरिया पर असर करे और इसका गलत इस्तेमाल न हो.

बैक्टीरिया के इलाज में होगा इस्तेमाल

भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल बैक्टीरिया के इलाज और वैक्सीन बनाने में किया जा सकता है. Personalized कैंसर वैक्सीन बनाने में समय को 8 से 12 हफ्तों से घटाकर 2 से 3 दिन किया जा सकता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह कदम एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस से लड़ने में एक बड़ा बदलाव ला सकता है. 

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