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Indore Contaminated Water Case: इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित जल आपूर्ति से फैली बीमारी मामले में लगातार अपडेट सामने आ रहे हैं. इसी कड़ी में अब इस केस को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा एक्शन देखने को मिला है. उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कहा है कि लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. शुक्रवार सुबह मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक स्तर पर बड़े फैसले लिए.
बड़े अधिकारियों पर गिरी गाज
मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इंदौर नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए. साथ ही अपर आयुक्त को तत्काल इंदौर से हटाने और प्रभारी अधीक्षण यंत्री से जल वितरण कार्य विभाग का प्रभार वापस लेने का आदेश दिया गया.
इसके अलावा नगर निगम में लंबे समय से खाली पड़े आवश्यक पदों को तत्काल भरने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराई न जाए.
पहले ही हो चुकी है निलंबन की कार्रवाई
इससे पहले मुख्यमंत्री ने दूषित पानी से लोगों के बीमार पड़ने की घटना को अत्यंत गंभीर मानते हुए जोन क्रमांक-4 के जोनल अधिकारी, सहायक यंत्री और प्रभारी सहायक यंत्री (PHE) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। वहीं प्रभारी उपयंत्री PHE को सेवा से बाहर कर दिया गया. पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की जांच समिति भी गठित की गई है.
राहत कार्य युद्धस्तर पर, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
मामले के तूल पकड़ते ही प्रशासन ने प्रभावित इलाके में युद्धस्तर पर राहत और चिकित्सा कार्य शुरू कर दिए हैं.
- अब तक 40 हजार से अधिक नागरिकों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की जा चुकी है
- कुल 272 मरीज भर्ती हुए
- 71 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज किए जा चुके हैं
- फिलहाल 201 मरीज भर्ती, जिनमें 32 ICU में हैं
- सीएम ने MY अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों को निःशुल्क और सर्वोत्तम इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं.
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