Who was Rajagopalachari: कौन थे स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर-जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी? जिनकी राष्ट्रपति भवन में लगाई गई प्रतिमा

Who was Rajagopalachari: राष्ट्रपति भवन में आज (23 फरवरी) ‘राजाजी उत्सव’ के दौरान चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया गया. तो आइए जानते हैं उनके बारे में विस्तार से.

Who was Rajagopalachari: राष्ट्रपति भवन में आज (23 फरवरी) ‘राजाजी उत्सव’ के दौरान चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया गया. तो आइए जानते हैं उनके बारे में विस्तार से.

author-image
Deepak Kumar
New Update
Who-was-rajagopalachari

Who was Rajagopalachari: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज (23 फरवरी) राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में ‘राजाजी उत्सव’ के अवसर पर स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर-जनरल की प्रतिमा का अनावरण किया. इस अवसर पर देश ने एक बार फिर उस महान व्यक्तित्व को याद किया, जिन्होंने आजादी के बाद राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. बता दें कि 22 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 131वें एपिसोड में राजगोपालाचारी का विशेष उल्लेख किया. प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान उन्होंने ‘पंच-प्राण’ का आह्वान किया था, जिसमें एक संकल्प गुलामी की मानसिकता से मुक्ति का भी था. उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति भवन में ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस की प्रतिमा की जगह अब राजाजी की प्रतिमा स्थापित की गई है. यह बदलाव देश की सोच और आत्मसम्मान का प्रतीक है. तो आइए जानते हैं आखिर कौन थे चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, जिन्हें 'राजाजी' या 'सी. राजगोपालाचारी' के नाम से जाना जाता है.

Advertisment

कौन थे राजाजी?

चक्रवर्ती राजगोपालाचारी का जन्म 10 दिसंबर 1878 को मद्रास प्रेसीडेंसी में हुआ था. वे पेशे से वकील थे, लेकिन देश सेवा के लिए उन्होंने अपनी सफल वकालत छोड़ दी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ गए. उन्होंने रॉलेट एक्ट के विरोध, असहयोग आंदोलन और सविनय अवज्ञा आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई. 

15 अगस्त 1947 को भारत की आजादी के बाद वे स्वतंत्र भारत के पहले और अंतिम भारतीय गवर्नर-जनरल बने. 1950 में भारत के गणतंत्र बनने के बाद यह पद समाप्त हो गया. वे 1947-48 में विभाजन के बाद पश्चिम बंगाल के पहले गवर्नर भी रहे. राजाजी महान विचारक, लेखक और दूरदर्शी नेता थे. वे महात्मा गांधी के करीबी सहयोगी और उनके समधी भी थे. उन्हें 1954 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया. राजगोपालाचारी का जीवन सादगी, ईमानदारी और राष्ट्र सेवा का प्रतीक था. आज भी उनका व्यक्तित्व देशवासियों को कर्तव्य और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है.

यह भी पढ़ें- 'एआई सम्मेलन में भारत की क्षमता की पूरी दुनिया ने सराहना की', PM Modi ने कहा- पूरी मानवता को होगा फायदा

C Rajagopalachari INDIA
Advertisment