'कानून नहीं मान सकते तो भारत से निकल जाएं', सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप और मेटा को दी चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को व्हाट्सएप और मेटा को यूजर्स प्राइवेसी को लेकर फटकार लगाई. इसके साथ ही देश के संविधान और कानून का पालन ना करने पर देश से बाहर जाने की भी चेतावनी दी.

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को व्हाट्सएप और मेटा को यूजर्स प्राइवेसी को लेकर फटकार लगाई. इसके साथ ही देश के संविधान और कानून का पालन ना करने पर देश से बाहर जाने की भी चेतावनी दी.

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Suhel Khan
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SC Warns Whatsapp and Meta

सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप और मेटा को चेतावनी Photograph: (File/Social Media)

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को व्हाट्सएप और मेटा को नागरिकों की निजता से खिलवाड़ करने के लिए कड़ी फटकार लगाई. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर वह भारत के संविधान और कानून को नहीं मान सकते तो भारत से निकल जाएं. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक. और व्हाट्सएप को कड़ी फटकार लगाई. दरअसल, मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के उस आदेश के खिलाफ उनके अपीलों पर सुनवाई की, जिसमें उनकी गोपनीयता नीति को लेकर 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था.

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CJI ने भारत से निकलने की दी चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सख्त रुख अपनाते हुए व्हाट्सएप और मेटा को बड़ी चेतावनी दी. सीजेआई सूर्यकांत ने नागरिकों की प्राइवेसी को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए वॉट्सऐप की पेरेंट कंपनी मेटा से दो टूक कहा कि नागरिकों की निजता से किसी भी कीमत पर खिलवाड़ नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि अगर कोई कंपनी देश के संविधान और कानूनों का पालन नहीं कर सकती, तो उसके लिए विकल्प बहुत स्पष्ट है. वह भारत से बाहर निकल जाए.

एससी में मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने मेटा से बेहद सख्त लहजे में कहा कि, "हम आपको एक भी जानकारी साझा करने की अनुमति नहीं देंगे." सीजेआई ने कहा कि, आप इस देश के नागरिकों के अधिकारों से नहीं खेल सकते. यह संदेश आपके वॉट्सऐप को भी साफ तौर पर जाना चाहिए."

सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप की प्राइवेट पॉलिसी पर उठाए सवाल

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने व्हाट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी पर भी गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि, "यह बहुत चालाकी से इस तरह तैयार की गई है कि आम उपयोगकर्ता भ्रमित हो जाए." सीजेआई ने कहा कि, आपकी प्राइवेसी पॉलिसी इस तरह बनाई गई है कि कोई गरीब, बुजुर्ग या महिला, जो सड़क पर सब्जी बेचती हो, या जो सिर्फ तमिल समझती हो, या जो ग्रामीण इलाकों से आती हो, वह आपकी मंशा को आखिर कैसे समझ पाएगी?

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि, "क्या यह कोई विकल्प है कि आप वॉट्सएप सेवा से बाहर निकल जाएं और फिर भी आपका डेटा साझा किया जाए? विकल्प बहुत सरल है. या तो आप साफ तौर पर वचन दे या हम एक शब्द भी डेटा साझा करने की अनुमति नहीं देंगे. अन्यथा हमें आदेश पारित करना होगा."

सुप्रीम कोर्ट में क्या दी मेटा ने दलील?

मेटा की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए वकील ने एससी में कहा कि, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की तरफ से लगाया गया जुर्माना जमा कर दिया गया है, हालांकि मामला अपील के अधीन है. उन्होंने आगे कहा कि उपभोक्ताओं के पास ऑप्ट-आउट का विकल्प मौजूद है. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि 15 नवंबर के आदेश से जुड़े निर्देशों का पालन भी किया जा रहा है.

9 फरवरी को आ सकता है अंतरिम आदेश

इस पर सीजेई ने कहा कि, ऑप्ट-आउट जैसे विकल्प नागरिकों के मौलिक अधिकारों का विकल्प नहीं हो सकते. सीजेआई ने साफ कहा कि किसी भी हाल में डेटा शेयरिंग की अनुमति नहीं दी जा सकती. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कई अहम निर्देश भी दिए. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि वह इस मामले में 9 फरवरी को अंतरिम आदेश पारित करेगी.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस पर काउंटर दलील चार सप्ताह के भीतर दाखिल किया जाए. एससी ने कहा कि सीसीआई की ओर से मेटा पर लगाया गया जुर्माना जमा रहेगा, लेकिन अगले आदेश तक राशि की निकासी पर रोक रहेगी. अब ये मामला तीन सदस्यी पीठ के सामने जाएगा. जहां डेटा गोपनीयता, टेक कंपनियों की जवाबदेही और नागरिकों के अधिकारों को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है. ऐसे में अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं.

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