'सरकारें मुफ्त पैसे, बिजली या दूसरी सुविधाएं देती रहीं तो इनका खर्च कौन उठाएगा', फ्रीबीज को लेकर SC की सख्त टिप्पणी

फ्रीबीज को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त टिप्पणी की है. सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि सरकारों को मुफ्त चीजें बांटने की बजाए रोजगार पैदा करने पर अधिक जोर देने की जरूरत है.

फ्रीबीज को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त टिप्पणी की है. सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि सरकारों को मुफ्त चीजें बांटने की बजाए रोजगार पैदा करने पर अधिक जोर देने की जरूरत है.

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Mohit Saxena
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Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट

फ्रीबीज को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी सामने सामने आई है. सुप्रीम कोर्ट ने मुफ्त सुविधाओं वाली  योजनाओं को लेकर कहा कि कई राज्यों की सरकारें भारी कर्ज और घाटे में हैं. इसके बाद भी मुफ्त योजनाएं बांटी जा रही हैं. इसके बजाए रोजगार पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है. यह टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने की है. 

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रोजगार पैदा करने पर अधिक जोर देने की जरूरत

सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच तामिलनाडु की बिजली कंपनी से जुड़े एक केस की सुनवाई कर रही थी.  बिजली कंपनी की ओर से कहा गया कि हमने टैरिफ की दरें पहले ही तय कर दी थीं. बाद में सरकार की ओर से कहा गया कि हमने बिजली को फ्री कर दिया है. इस पर सीजेआई की बेंच ने सख्त टिप्पणी की. बेंच ने कहा कि अगर सरकारें मुफ्त पैसे, बिजली या दूसरी सुविधाएं देती रही तो इनका खर्च कौन उठाएगा? उन्होंने कहा कि आखिर फ्रीबीज का बोझ टैक्स देने वाले लोगों पर पड़ने वाला है. 

सरकार को ध्यान देने की जरूरत: कोर्ट

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इस तरह से फ्रीबीज बांटने से देश के आर्थिक विकास पर असर होगा. कुछ लोग एजुकेशन या बेसिक लाइफ का खर्च नहीं उठा सकते हैं. उन लोगों को सुविधा देने को लेकर राज्य का फर्ज है,  लेकिन फ्रीबीज पहले उनकी जेब में पहुंच रहा जो लोग मजे कर रहे हैं. क्या यह इस तरह चीज नही है, जिस पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है?

चुनाव से ठीक पहले स्कीम्स क्यों अनाउंस होती हैं

सीजेआई ने कहा कि हमे ऐसे राज्यों की जानकारी है, जहां पर फ्री बिजली है. भले ही आप बड़े लैंडलॉर्ड हों. आप लाइट जलाते हैं. अगर आपको किसी तरह की सुविधा चाहिए, तो आपको उसके लिए पे करना जरूरी है. यह टैक्स का पैसा है. उन्होंने कहर कि हम सिर्फ तमिलनाडु के ये बातें नहीं कर रहे हैं. सीजेआई ने सवाल किया कि अकसर चुनाव से ठीक पहले स्कीम्स क्यों अनाउंस होती हैं. 

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