सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को दिए निर्देश, हर स्कूल में नि:शुल्क उपलब्ध कराएं सैनेटरी पैड

Sanitary Pad School: स्कूलों में लड़कियों को मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध करवाने और उनके लिए अलग से टॉयलेट की व्यवस्था करने की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी. सुनाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय को सुरक्षित रखा था.

Sanitary Pad School: स्कूलों में लड़कियों को मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध करवाने और उनके लिए अलग से टॉयलेट की व्यवस्था करने की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी. सुनाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय को सुरक्षित रखा था.

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Mohit Saxena
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Photograph: (ANI)

Sanitary Pad School: सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि हर स्कूल में सैनेटरी पैड होना जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट ने सभी सरकारों को आदेश दिया कि लड़कियों के लिए स्कूल में अलग टॉयलेट की सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए. तीन माह  के अंदर इस आदेश का पालन  करने को कहा गया है. कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार में मासिक धर्म स्वास्थ्य का अधिकार भी शामिल है. सुरक्षित, प्रभावी और किफायती मासिक  धर्म स्वच्छता प्रबंधन उपायों तक पहुंच एक बालिका को यौन और प्रजनन स्वास्थ्य के उच्चतम स्तर तक पहुंचने में सहायता करती है. स्वस्थ प्रजनन जीवन के अधिकार में यौन स्वास्थ्य से संबंधित शिक्षा और जानकारी तक पहुंच का अधिकार भी जुड़ा है. 

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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा ​कि इस निर्णय से सिर्फ कानूनी व्यवस्था से जुड़े लोगों के लिए नहीं है. यह कक्षाओं के लिए भी है. यहां पर लड़कियां सहायता मांगने में झिझकती हैं. यह फैसला उन शिक्षकों के लिए भी है, जो मदद करना चाहते हैं, मगर संसाधनों की कमी की वजह से ऐसा नहीं कर पाते. 

उनके शरीर को एक बोझा की तरह देखा जाता है: कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह उन माता-पिता के लिए है, जिन्हें शायद अपनी चुप्पी के असर का एहसास नहीं है, और समाज के लिए है, ताकि यह साबित हो सके कि प्रगति का माप इस बात से होती है कि हम सबसे कमजोर लोगों की रक्षा किस तरह से करते हैं. हम हर उस बच्ची को संदेश देता चाहते हैं जो शायद इसलिए स्कूल से अनुपस्थित रहने की शिकार हुईं, क्योंकि उनके शरीर को एक बोझा की तरह देखा जाता है. इसमें किसी तरह की गलती नहीं है. ये शब्द कोर्ट और कानूनी समीक्षा रिपोर्टों से परे होकर समाज की आम चेतना तक पहुंचना जरूरी है.

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