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सोमनाथ मंदिर ज्योतिर्लिंग पर हमले के 1000 साल बीत चुके हैं. आपको बता दे कि सन् 1026 में सोमनाथ मंदिर पर पहली बार आक्रमण हुआ था. इसके बाद सोमनाथ मंदिर पर कई आक्रमण हुए. मंदिर में लूटपाट मचाई गई. इसे नष्ट करने का प्रयास किया गया. मगर आज भी मंदिर अपना मूलरूप लिए खड़ा है. पीएम नरेंद्र मोदी भी 11 जनवरी को गुजरात में मौजूद सोमनाथ मंदिर में जाने वाले हैं. पीएम यहां सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल होने वाले हैं. इससे पहले भाजपा ने सोमनाथ मंदिर को लेकर भारत के पहले पीएम जवाहरलाल नेहरू पर निशाना साधा है. भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने इसे लेकर कई बड़े दावे कर डाले हैं.
सबसे अधिक नफरत पंडित नेहरू को थी: सुधांशु
भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, अतीत में सोमनाथ को मोहम्मद गजनी और खिलजी ने लूटा. मगर आजाद भारत में भगवान सोमनाथ से सबसे अधिक नफरत पंडित नेहरू को थी. इसकी सबसे बड़ा सबूत देखिए कि पंडित नेहरू ने 21 अप्रैल 1951 को पाक पीएम लियाकत अली खान को "प्रिय नवाबजादा" कहकर संबोधित किया. उन्हें पत्र लिखा और उसमें सोमनाथ के दरवाजों की कहानी को पूरी तरह से झुठला दिया. पंडित नेहरू ने लिखा कि मंदिर के निर्माण में कुछ नहीं हुआ.
पाकिस्तान को खुश करना चुना: सुधांशु
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा,आखिर पंडित नेहरू को लियाकत अली खान से ऐसा क्या डर था. वे उन्हें सोमनाथ मंदिर के बारे में पत्र में बता रहे थे. पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा का सामना करने या भारत की सभ्यतागत स्मृति का बचाव को कम करके पाक को खुश करना चुना. आंतरिक आत्मविश्वास के बजाय बाहरी तुष्टीकरण को प्राथमिकता दी. यह अंधी तुष्टिकरण की राजनीति और मुगल आक्रांताओं का महिमामंडन नहीं था तो और क्या था?"
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