पहली बार बांग्लादेश में शेडो कैबिनेट! विपक्ष का 'वॉचडॉग' प्लान, पारदर्शिता आएगी या उपजेगा नया विवाद?

Shadow Cabinet Bangladesh: शेडो कैबिनेट के पास कोई आधिकारिक सत्ता नहीं होती इनके पास कोई कार्यकारी अधिकार नहीं होता. लेकिन यह लोकतंत्र की मजबूती के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है ये कैबिनेट सरकार पर लगातार निगरानी रखती है.

Shadow Cabinet Bangladesh: शेडो कैबिनेट के पास कोई आधिकारिक सत्ता नहीं होती इनके पास कोई कार्यकारी अधिकार नहीं होता. लेकिन यह लोकतंत्र की मजबूती के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है ये कैबिनेट सरकार पर लगातार निगरानी रखती है.

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Amit Kasana
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प्रतिकात्मक फोटो

What is Shadow Cabinet in Bangladesh: पिछले कुछ दिनों से बांग्लादेश की राजनीति में एक नया शब्द काफी गूंज रहा है वह है शेडो कैबिनेट (Shadow Cabinet). दरअसल, यहां 12 फरवरी 2026 को हुए 13वें संसदीय चुनाव में बीएनपी (Bangladesh Nationalist Party) को भारी बहुमत मिलने के बाद नई सरकार बनने वाली है. आज तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे. इसी बीच विपक्षी दलों खासकर नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) और जमात-ए-इस्लामी से जुड़े नेताओं ने शेडो कैबिनेट बनाने की तैयारी की घोषणा कर दी है. तो अब सवाल यह उठता है कि आखिर यह शेडो कैबिनेट क्या चीज है और बांग्लादेश में इसकी इतनी चर्चा क्यों हो रही है?

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शेडो कैबिनेट का मतलब और कामकाज क्या होता है?

राजनीति के जानकारों के अनुसार शेडो कैबिनेट मूल रूप से ब्रिटेन की वेस्टमिंस्टर संसदीय व्यवस्था से आया एक कॉन्सेप्ट है. इसमें सत्तारूढ़ सरकार की कैबिनेट के हर मंत्री के सामने विपक्षी दल अपने एक-एक सीनियर नेता को खड़ा करते हैं. इन विपक्षी नेताओं को शैडो मिनिस्टर कहा जाता है, और वे उस खास मंत्रालय की नीतियों पर नजर रखते हैं. ये लोग सरकार की नीतियों की आलोचना करते हैं, संसद में सवाल उठाते हैं, वैकल्पिक प्रस्ताव रखते हैं और जनता के सामने दिखाते हैं कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आई तो वे कैसे काम करेंगे.

शेडो कैबिनेट के पास कोई आधिकारिक सत्ता नहीं होती

शेडो कैबिनेट के पास कोई आधिकारिक सत्ता नहीं होती इनके पास कोई कार्यकारी अधिकार नहीं होता. लेकिन यह लोकतंत्र की मजबूती के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है ये कैबिनेट सरकार पर लगातार निगरानी रखती है. इससे सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है. बता दें ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जैसे कई लोकतांत्रिक देशों में यह प्रथा काफी पहले से प्रचलित है.

क्या बांग्लादेश में शेडो कैबिनेट की जरूरत है?

बांग्लादेश में अब तक कभी कोई औपचारिक शेडो कैबिनेट नहीं बनी है. यहां राजनीति ज्यादातर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी टकराव वाली रही है. लेकिन 2024 के जुलाई आंदोलन और उसके बाद की घटनाओं ने राजनीतिक माहौल बदल दिया. हालिया चुनाव में जहां बीएनपी को 200+ सीटें मिलीं, जबकि जमात-ए-इस्लामी और उसके गठबंधन (जिसमें NCP भी शामिल) को करीब 70-80 सीटें आईं. NCP के प्रवक्ता असीफ महमूद शोजिब भुइयां ने फेसबुक पर लिखा कि वे शेडो कैबिनेट बना रहे हैं, जो सरकार की हर गतिविधि पर नजर रखेगा, पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा और वॉचडॉग की तरह काम करेगा. यह पहली बार है जब बांग्लादेश में कोई बड़ा विपक्षी दल इस तरह की व्यवस्थित "शैडो" टीम बनाने की बात कर रहा है. कई विश्लेषकों का मानना है कि इससे राजनीति में नई परिपक्वता आएगी. शेडो कैबिनेट बनाने से विपक्ष को मजबूत आवाज मिल सकती है, खासकर जब नई सरकार सुधारों और संवैधानिक बदलावों पर काम कर रही है.

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