पिता और दादा के नक्शेकदम पर युवा अफसर, कर्तव्य पथ पर दिखेगा फौजी परिवारों की तीन-चार पीढ़ियों का जोश

नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड के लिए भारतीय सेना की तैयारियां अंतिम चरण में हैं. लेफ्टिनेंट अमित चौधरी सहित कई युवा अधिकारी विभिन्न सैन्य टुकड़ियों का नेतृत्व करेंगे. यह परेड कई परिवारों के लिए परंपरा, गौरव और पीढ़ियों की सैन्य सेवा का प्रतीक बनेगी.

नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड के लिए भारतीय सेना की तैयारियां अंतिम चरण में हैं. लेफ्टिनेंट अमित चौधरी सहित कई युवा अधिकारी विभिन्न सैन्य टुकड़ियों का नेतृत्व करेंगे. यह परेड कई परिवारों के लिए परंपरा, गौरव और पीढ़ियों की सैन्य सेवा का प्रतीक बनेगी.

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Ravi Prashant
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Republic Day parade

भारत का 77वां गणतंत्र दिवस Photograph: (DD/ANI)

नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होने वाली इस साल की गणतंत्र दिवस (Republic Day) परेड बेहद खास होने वाली है. यह सिर्फ सैन्य ताकत का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि कई युवा अफसरों के लिए अपने परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने का एक भावुक पल भी है.

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फौजी परिवारों की नई पीढ़ी संभालेगी कमान

इस बार परेड में हिस्सा ले रहे कई युवा अधिकारी ऐसे हैं जिनकी कई पीढ़ियां सेना में रही हैं. लेफ्टिनेंट अमित चौधरी, जो अरुणाचल स्काउट्स के दल का नेतृत्व कर रहे हैं, उनके पिता ने 1990 में इसी परेड में हिस्सा लिया था. वहीं, कैप्टन समीरा जेड बुट्टर अपने परिवार की चौथी पीढ़ी की अफसर हैं. उनके दादा 1965 की जंग के हीरो थे जिन्हें महावीर चक्र और वीर चक्र से नवाजा गया था.

आधुनिक हथियारों और तकनीक का जलवा

भारतीय सेना अपनी बढ़ती ताकत का अहसास कराने के लिए कई आधुनिक हथियार पेश करेगी. इस बार कर्तव्य पथ पर ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश मिसाइल सिस्टम, धनुष तोप और सूर्यास्त्र रॉकेट लॉन्चर जैसे स्वदेशी हथियार दिखाई देंगे. साथ ही, पहली बार ड्रोन और बिना इंसान के चलने वाले 'अनमैन्ड ग्राउंड व्हीकल' भी परेड का हिस्सा बनेंगे, जो मुश्किल रास्तों पर निगरानी और सामान पहुंचाने का काम करते हैं

खास ड्रेस और 'मौन योद्धाओं' की झलक

परेड में कुछ बदलाव भी देखने को मिलेंगे. 61 कैवेलरी के घुड़सवार सैनिक इस बार अपनी पारंपरिक वर्दी के बजाय युद्ध के मैदान में पहनी जाने वाली 'कॉम्बैट ड्रेस' में नजर आएंगे. इसके अलावा, सेना के 'साइलेंट वॉरियर्स' यानी जांस्कर पोनी, ऊंट, शिकारी पक्षी और डॉग स्क्वाड भी अपनी जांबाजी दिखाएंगे. ये जानवर दुर्गम इलाकों और ऊंचे पहाड़ों पर सेना की मदद करते हैं.

झांकी में दिखेगी सेना की रणनीति

इस साल की झांकी का मुख्य विषय 'इंटीग्रेटेड ऑपरेशन सेंटर' रखा गया है. यह झांकी 'ऑपरेशन सिंदूर' की याद दिलाएगी और दिखाएगी कि कैसे भारतीय सेना युद्ध के दौरान अपनी रणनीतियां बनाती है. रिहर्सल के दौरान बारिश के बावजूद जवानों का जोश देखने लायक था, जहां वे पोलराइज्ड चश्मे और ऊंचाई वाले इलाकों में पहने जाने वाले विशेष जूतों के साथ कदमताल करते नजर आए.

करीब 90 मिनट की इस भव्य परेड में 18 मार्चिंग टुकड़ियां और 13 सैन्य बैंड शामिल होंगे. यह नजारा भारतीय सेना की पुरानी परंपरा और नई टेक्नोलॉजी के बेहतरीन तालमेल को दुनिया के सामने रखेगा.

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Republic Day
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