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republic day (DD/ANI)
Republic Day 2026: भारत 77वां गणतंत्र दिवस एक भव्य सैन्य परेड के साथ मनाने जा रहा है. इसमें देश की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और तकनीकी प्रगति का प्रदर्शन होता है. यह प्रक्रिया ब्रिटिश काल से जारी है. परंपरा को बढ़ाते हुए यह परेड रायसीना हिल्स से शुरू होगी और कर्तव्य पथ से होते हुए इंडिया गेट से गुजरेगी. यह लाल किले पर खत्म होगी. इसके आयोजन का लक्ष्य सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करना है. वहीं देशभक्ति को बढ़ावा देना है. इससे सशस्त्र बलों की विभिन्न इकाइयों को सामने लाना है. सेवाओं में लैंगिक विविधता को दर्शाना है.
जानें देश के पहले गणतंत्र दिवस पर कितना हुआ था खर्च
स्वतंत्रता के बाद से गणतंत्र दिवस परेड हर साल आयोजित की जाती है.आमतौर पर इसके आयोजन में करोड़ों रुपये का खर्च आता है. एक रिपोर्ट अनुसार, 2015 में 320 करोड़ रुपये का खर्च आया था. हालांकि शुरुआती वर्षों में यह लागत बेहद कम थी. भारत ने 1950 में अपना पहला गणतंत्र दिवस मनाया था. उस समय कुल खर्च करीब 11,250 रुपये तक था. तब इस पर 11,093 रुपये का खर्च आया था. इसके बाद अन्य वर्षों में खर्च में लगातार इजाफा हुआ. रिपोर्ट के अनुसार, गणतंत्र दिवस पर होने वाला खर्च 1956 में बढ़कर 5,75,000 रुपये तक पहुंच गया. वहीं 1971 में 17,12,000 रुपए तक पहुंचा. ये 1973 में 23,38,000 रुपए तक पहुंचा. वहीं 1988 में 69,69,159 रुपए हो गया.
पुराने दस्तावेज सामने आए
अभिलेखों से जानकारी मिली कि 1950 में दिल्ली प्रशासन ने रिलीफ होम्स और और ग्रामीण स्कूलों में सादे समारोहों में पहला गणतंत्र दिवस मनाया गया. बच्चों को इस दौरान स्मृति चिन्ह के रूप में थालियां दी गईं. वहीं महिला कैदियों को मिठाई बांटी गई. इसके साथ खिलौने वितरित किए गए. फाइलों से सामने आया है कि समारोह काफी हद तक सादगीपूर्ण था. इसमें बच्चों, विस्थापित परिवारों और सरकारी संस्थानों में निवास करने वाली महिलाओं पर विशेष ध्यान दिया गया था. इसके लिए 750 रुपए की राशि स्वीकृत की गई. इसमें करीब 525 रुपए खर्च और 225 रुपए बचा था. मार्च 1950 के बाद बची राशि का उपयोग महिला अनुभाग दिवस समारोह के लिए करने की इजाजत दी गई थी.
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