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अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे पश्चिम एशिया के सुरक्षा परिदृश्य को अस्थिर कर दिया है. मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाओं के बाद खाड़ी क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है. ऐसे संवेदनशील समय में भारत ने हालात पर पैनी नजर रखते हुए कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है. प्राथमिकता स्पष्ट है क्षेत्र में शांति की अपील और वहां रह रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना.
ओमान से बातचीत: समुदाय की सुरक्षा पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले सुल्तान हैथम बिन तारिक से फोन पर बातचीत की. ओमान में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक कार्यरत हैं, जो निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा और सेवा क्षेत्र में अहम भूमिका निभाते हैं. वार्ता के दौरान मौजूदा सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की गई और भारतीय समुदाय की सुरक्षा एवं कल्याण पर विशेष चर्चा हुई. ओमान लंबे समय से भारत का विश्वसनीय साझेदार रहा है और दोनों देशों के बीच मानवीय व आर्थिक रिश्ते मजबूत माने जाते हैं.
कुवैत और कतर से समन्वय
इसके बाद प्रधानमंत्री ने शेख सबा अल खालिद अल हमद अल मुबारक अल सबा से संपर्क किया. कुवैत भी क्षेत्रीय तनाव से अछूता नहीं है. दोनों पक्षों ने सुरक्षा सहयोग और आपसी समन्वय बढ़ाने पर सहमति जताई, ताकि किसी भी आपात स्थिति में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
इसी क्रम में प्रधानमंत्री ने तमीम बिन हमद अल थानी से भी बातचीत की. हालिया हमलों की निंदा करते हुए उन्होंने कतर सरकार द्वारा भारतीय समुदाय को दी जा रही सुरक्षा और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया. कतर में ऊर्जा, निर्माण और सेवा क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय काम कर रहे हैं, जो वहां की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं.
48 घंटों में कई देशों से संपर्क
सरकारी सूत्रों के अनुसार, बीते दो दिनों में भारत ने खाड़ी और पश्चिम एशिया के कई शीर्ष नेताओं से संपर्क साधा है. इनमें यूएई, इजरायल, सऊदी अरेबिया, जॉर्डन, बहरीन, ओमान, कुवैत और कतर शामिल हैं.
इन संपर्कों का उद्देश्य क्षेत्रीय हालात की प्रत्यक्ष जानकारी लेना और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए समन्वय बनाए रखना रहा.
90 लाख भारतीयों की सुरक्षा सर्वोपरि
खाड़ी देशों में लगभग 90 लाख भारतीय रहते हैं। ये प्रवासी भारतीय न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं, बल्कि भारत के लिए भी विदेशी मुद्रा का महत्वपूर्ण स्रोत हैं. ऐसे में क्षेत्रीय अस्थिरता भारत के लिए मानवीय और आर्थिक दोनों दृष्टि से चिंता का विषय है.
भारत ने सभी वार्ताओं में स्पष्ट किया कि वह संवाद और कूटनीति के माध्यम से तनाव कम करने के पक्ष में है. प्रधानमंत्री ने नेताओं से अपील की कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएं.
शांति और संतुलन की नीति
वर्तमान संकट ने यह दिखाया है कि वैश्विक और क्षेत्रीय तनाव का असर सीमाओं से परे जाता है. भारत ने एक संतुलित और जिम्मेदार रुख अपनाते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है.
इस सक्रिय कूटनीति का संदेश स्पष्ट है भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के प्रति सजग है और पश्चिम एशिया में स्थिरता बनाए रखने के लिए हरसंभव सहयोग देने को तैयार है.
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