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मिडिल ईस्ट में इस वक्त सबकुछ उथल-पुथल है. अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान के तनाव में कई देशों में दहशत का माहौल बना रखा है. लेकिन अब भी एक चर्चा हर तरफ हो रही है और वह है ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत. खामेनेई की मौत को लेकर भी कई तरह के अपडेट सामने आ रहे हैं. जैसे उसका शव कहां है? खामेनेई को मारने के लिए कैसे इजरायल और अमेरिका ने साइबर अटैक किया, या फिर खामेनेई की मौत के लिए अमेरिका को अपनी जेब से कितनी रकम खर्च करना पड़ी. जी हां अमेरिका ने खामेनेई को मारने में एक मोटी रकम खर्च कर डाली है.
नई रिपोर्ट में दावा
अमेरिकी खुफिया गतिविधियों को लेकर एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि CIA ने ईरान में व्यापक स्तर पर निगरानी तंत्र सक्रिय कर रखा था. रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान में हुए एक बड़े हमले से पहले एजेंसी ने स्थानीय स्तर पर अपने अधिकारियों और नेटवर्क के जरिए महत्वपूर्ण सूचनाएं जुटाईं.
दावा यह भी है कि ईरान की सड़कों पर लगे सीसीटीवी और ट्रैफिक कैमरों तक पहुंच बनाकर संबंधित गतिविधियों पर करीबी नजर रखी गई. निगरानी इतनी सटीक बताई जा रही है कि लक्षित व्यक्ति की गतिविधियों की पल-पल की जानकारी जुटाई जा रही थी.
2023 के बाद बढ़ी सक्रियता
अक्टूबर 2023 में इज़राइल पर हमलों के बाद अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी खुफिया और सैन्य गतिविधियों को तेज कर दिया था। एक विश्लेषण रिपोर्ट के मुताबिक 2023 से 2025 के बीच ईरान से जुड़ी खुफिया गतिविधियों पर लगभग 2.5 बिलियन डॉलर खर्च किए गए. ये रिपोर्ट Brown Edu की विश्लेषण रिपोर्ट है.
इसी अवधि में अमेरिका ने इज़राइल को 21.7 बिलियन डॉलर का सैन्य पैकेज दिया और क्षेत्रीय अभियानों के लिए 12.7 बिलियन डॉलर अलग से निर्धारित किए. यह राशि अक्टूबर 2023 से सितंबर 2025 के बीच खर्च की गई बताई जाती है. हालांकि अक्टूबर 2025 के बाद के खर्च का आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है.
नेतृत्व की निगरानी और राजनीतिक बयान
रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अली खामेनेई लंबे समय से अमेरिकी एजेंसियों की निगरानी सूची में थे. वे खुलकर अमेरिकी नीतियों की आलोचना करते रहे थे और कभी अमेरिका की यात्रा पर नहीं गए. हमले के बाद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुफिया एजेंसियों की सराहना करते हुए इसे बड़ी उपलब्धि बताया. इजरायली मीडिया के अनुसार, हमले के बाद उन्हें और बेंजामिन नेतन्याहू को कथित रूप से सबूत दिखाए गए. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.
बजट और रणनीतिक प्राथमिकता
नवंबर 2025 में CIA की उप-निदेशक मैरी मार्गरेट ग्राहम ने एजेंसी का वार्षिक बजट 44 बिलियन डॉलर बताया था, लेकिन ईरान से जुड़े अभियानों पर खर्च की गई सटीक राशि सार्वजनिक नहीं की गई. पूर्व CIA एजेंट जॉन किरियाकू ने भी फरवरी 2026 की शुरुआत में संकेत दिया था कि ईरान को लेकर बड़े घटनाक्रम संभव हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में बढ़ती अस्थिरता और क्षेत्रीय संघर्षों के कारण अमेरिका ने अपनी खुफिया क्षमताओं को और अधिक तकनीकी और डिजिटल आधार पर केंद्रित किया है. एआई आधारित डेटा विश्लेषण, साइबर निगरानी और जमीनी नेटवर्क ये सभी आधुनिक खुफिया रणनीति का हिस्सा बन चुके हैं.
हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन यह स्पष्ट है कि मध्य पूर्व की राजनीति में खुफिया एजेंसियों की भूमिका पहले से कहीं अधिक निर्णायक हो चुकी है.
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