Explainer: बंगाल में राष्ट्रपति का अपमान? ममता सरकार और केंद्र के बीच प्रोटोकॉल पर छिड़ी 'जंग, जानें क्या है पूरा विवाद

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल और आयोजन स्थल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. मुख्यमंत्री या मंत्रियों की अनुपस्थिति और कार्यक्रम स्थल पर सवाल उठने के बाद केंद्र और राज्य सरकार के बीच सियासी टकराव बढ़ गया है. गृह मंत्रालय ने मामले पर रिपोर्ट मांगी है.

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल और आयोजन स्थल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. मुख्यमंत्री या मंत्रियों की अनुपस्थिति और कार्यक्रम स्थल पर सवाल उठने के बाद केंद्र और राज्य सरकार के बीच सियासी टकराव बढ़ गया है. गृह मंत्रालय ने मामले पर रिपोर्ट मांगी है.

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Ravi Prashant
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President Draupadi Murmu Bengal visit controversy

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और सीएम ममता बनर्जी Photograph: (ANI)

देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 7 मार्च को पश्चिम बंगाल के संथाल दौरे पर पहुंची थीं. वे वहां 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने आई थीं. कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति काफी नाराज और दुखी नजर आईं. उनकी नाराजगी की दो मुख्य वजहें थीं. पहला, उनके स्वागत के लिए बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या उनके मंत्रिमंडल का कोई भी मंत्री मौजूद नहीं था. दूसरा, कार्यक्रम का स्थल (वेन्यू), जिसे लेकर राष्ट्रपति ने अपनी असंतुष्टि जाहिर की. उन्होंने इशारों-इशारों में मुख्यमंत्री पर तंज भी कसा.

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आयोजन स्थल पर उठा विवाद

राष्ट्रपति ने आदिवासी समुदाय के इस महत्वपूर्ण वार्षिक कार्यक्रम के आयोजन स्थल को बिधाननगर से गोशाईपुर ट्रांसफर किए जाने पर गंभीर सवाल खड़े किए. जिस जगह पर कार्यक्रम हुआ, वह काफी छोटी और तंग थी. संथाल कॉन्फ्रेंस खत्म करने के बाद जब वे दूसरे कार्यक्रम के लिए विधाननगर मैदान पहुंचीं, तो उन्होंने कहा कि यह लोकेशन काफी सही थी और अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन यहीं होने चाहिए थे. राष्ट्रपति ने कहा कि अगर यहां कार्यक्रम होता, तो कम से कम पांच लाख लोग आराम से आ सकते थे. उन्होंने सवाल उठाया कि इतने बड़े आयोजन के लिए इतनी तंग जगह क्यों चुनी गई?

राष्ट्रपति का भावुक संबोधन और 'ममता दीदी' का जिक्र

कार्यक्रम में राष्ट्रपति मुर्मू ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन को यह समझना चाहिए कि यह एक सेक्युलर देश है और यहां सभी का सम्मान होना चाहिए. उन्होंने कहा, "मैं काफी दुखी हूं, लेकिन यहां आकर खुश भी हूं." मुख्यमंत्री और मंत्रियों के न आने पर उन्होंने कहा कि ममता दीदी उनकी छोटी बहन जैसी हैं, पता नहीं क्या हुआ है, लेकिन उन्हें कोई गिला-शिकवा नहीं है. हालांकि, उनके शब्दों में छिपा दर्द साफ महसूस किया जा सकता था.

प्रधानमंत्री मोदी का तीखा हमला

राष्ट्रपति द्वारा व्यक्त किए गए दुख के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार को जमकर घेरा. पीएम मोदी ने लिखा कि यह घटना शर्मनाक और अभूतपूर्व है. उन्होंने कहा कि खुद आदिवासी समुदाय से आने वाली राष्ट्रपति जी का अपमान भारत की जनता के मन में गहरा दुख पहुंचाता है. पीएम ने आरोप लगाया कि टीएमसी सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं और वे संथाल संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विषय को बहुत लापरवाही से ले रहे हैं. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है और इसकी गरिमा का सम्मान होना चाहिए.

गृहमंत्री अमित शाह ने उठाए प्रोटोकॉल पर सवाल

देश के गृहमंत्री अमित शाह ने भी इस मुद्दे पर टीएमसी सरकार पर कड़ा प्रहार किया. उन्होंने 'एक्स' पर लिखा कि पश्चिम बंगाल की सरकार ने अपने अराजक आचरण से एक नया निम्न स्तर छू लिया है. अमित शाह ने कहा कि प्रोटोकॉल की घोर अवहेलना करते हुए राष्ट्रपति का अपमान किया गया है, जो राष्ट्र और लोकतांत्रिक मूल्यों पर एक धब्बा है. उन्होंने इसे आदिवासी भाई-बहनों का भी अपमान बताया और कहा कि जो सरकार नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है, वह सर्वोच्च पद का अपमान करने से भी नहीं हिचकिचाती

बीजेपी अध्यक्ष ने जताई कड़ी आपत्ति

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन नबीन ने भी इस घटना को पूरी तरह अस्वीकार्य और शर्मनाक बताया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अपमान संवैधानिक संस्थानों के प्रति टीएमसी की अवमानना को दर्शाता है. आदिवासी समुदाय की भावनाओं के प्रति असंवेदनशीलता चिंताजनक है. उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति का पद दलीय राजनीति से ऊपर है और संथाल संस्कृति के इस अनादर को देश कभी नहीं भुला पाएगा.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सफाई

विवाद बढ़ता देख मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपना पक्ष रखा. उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम एक निजी संगठन (इंटरनेशनल संथाल काउंसिल) द्वारा आयोजित किया गया था. ममता बनर्जी ने कहा कि जिला प्रशासन ने सुरक्षा समन्वय के बाद राष्ट्रपति सचिवालय को पहले ही लिखित और मौखिक रूप से सूचित कर दिया था कि आयोजकों की तैयारियां अपर्याप्त हैं. उन्होंने दावा किया कि 5 मार्च को राष्ट्रपति सचिवालय की टीम ने दौरा किया था और उन्हें भी व्यवस्थाओं की कमी के बारे में बताया गया था. ममता बनर्जी ने साफ किया कि वे या उनकी सरकार का कोई मंत्री अनुमोदित सूची या मंच योजना का हिस्सा नहीं थे, इसलिए प्रोटोकॉल के उल्लंघन का सवाल ही नहीं उठता. उनके अनुसार, मेयर और डीएम ने राष्ट्रपति का स्वागत और विदाई की थी.

गृह मंत्रालय हुआ एक्टिव

राष्ट्रपति के अपमान और प्रोटोकॉल में हुई चूक के मामले को केंद्र सरकार ने बहुत गंभीरता से लिया है. केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने इस पूरे मामले पर पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. गृह मंत्रालय ने आयोजन स्थल में हुए बदलाव और अन्य व्यवस्थाओं में हुई कमी को लेकर आज शाम 5 बजे तक का समय दिया है. मंत्रालय यह जानना चाहता है कि सर्वोच्च संवैधानिक पद के दौरे के समय इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई.

प्रेसिडेंट के प्रोटोकॉल में क्या होता है? 

भारत के राष्ट्रपति देश के प्रथम नागरिक और सर्वोच्च संवैधानिक प्रमुख होते हैं. उनकी सुरक्षा और गरिमा को बनाए रखने के लिए एक बहुत ही सख्त और विस्तृत 'प्रोटोकॉल' (Blue Book) का पालन किया जाता है. जब भी राष्ट्रपति किसी राज्य के दौरे पर जाते हैं, तो केंद्र और राज्य सरकार की यह जिम्मेदारी होती है कि वे इन नियमों का पालन करें.

स्वागत और विदाई का नियम

जब राष्ट्रपति किसी राज्य के दौरे पर हवाई अड्डे या रेलवे स्टेशन पहुंचते हैं, तो उनके स्वागत के लिए एक निश्चित क्रम तय होता है. प्रोटोकॉल के अनुसार, राज्य के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, स्थानीय मेयर, राज्य के मुख्य सचिव (Chief Secretary), पुलिस महानिदेशक (DGP) और संबंधित सैन्य कमांडर को वहां मौजूद होना अनिवार्य है. राष्ट्रपति के वापस जाते समय भी इन्हीं अधिकारियों को उन्हें विदाई देने आना पड़ता है.

राजनीतिक रंग लेता विवाद

इस पूरी घटना ने अब पूरी तरह से राजनीतिक रूप ले लिया है. एक तरफ बीजेपी इसे आदिवासी समुदाय और राष्ट्रपति के पद का अपमान बताकर टीएमसी को घेर रही है, वहीं टीएमसी इसे बीजेपी का निजी एजेंडा करार दे रही है. हैरानी की बात यह है कि इस पूरे संवेदनशील मसले पर अभी तक कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. बंगाल की राजनीति में 'राष्ट्रपति का अपमान' अब एक बड़ा मुद्दा बन गया है, जिससे आने वाले दिनों में केंद्र और राज्य के रिश्तों में और कड़वाहट आ सकती है. 

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Draupadi Murmu
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