एक ही कच्चे तेल से कैसे निकलते हैं पेट्रोल और डीजल? जानें रिफाइनरी के अंदर का पूरा खेल

पेट्रोल और डीजल दोनों एक ही कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल से बनते हैं. रिफाइनरी में इस तेल को अलग-अलग तापमान पर गर्म करके अलग किया जाता है. हल्का हिस्सा पेट्रोल बनता है जबकि भारी हिस्सा डीजल. दोनों ईंधनों की ताकत, माइलेज और इस्तेमाल अलग-अलग होता है.

पेट्रोल और डीजल दोनों एक ही कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल से बनते हैं. रिफाइनरी में इस तेल को अलग-अलग तापमान पर गर्म करके अलग किया जाता है. हल्का हिस्सा पेट्रोल बनता है जबकि भारी हिस्सा डीजल. दोनों ईंधनों की ताकत, माइलेज और इस्तेमाल अलग-अलग होता है.

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Ravi Prashant
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तेल का खेल समझें Photograph: (Grok AI)

अगर आप गाड़ी चलाते हैं या पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर नजर रखते हैं, तो यह सवाल जरूर मन में आता है कि आखिर ये दोनों ईंधन बनते कैसे हैं. दिलचस्प बात यह है कि पेट्रोल और डीजल दोनों एक ही स्रोत यानी कच्चे तेल से निकलते हैं. कच्चे तेल को वैज्ञानिक प्रक्रिया से अलग-अलग हिस्सों में बांटा जाता है और इसी से कई तरह के ईंधन तैयार किए जाते हैं. पेट्रोल और डीजल भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं.

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कच्चा तेल क्या होता है

पेट्रोल और डीजल की कहानी कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल से शुरू होती है. यह तेल जमीन के नीचे या समुद्र की गहराई में पाया जाता है. लाखों साल पहले धरती पर मौजूद पेड़-पौधे और जीव-जंतु दबकर धीरे-धीरे रासायनिक प्रक्रिया से तेल में बदल गए. जब इस तेल को जमीन से निकाला जाता है तो यह काला, गाढ़ा और चिपचिपा होता है. इसे सीधे इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, इसलिए इसे रिफाइनरी में भेजा जाता है.

रिफाइनरी में कैसे अलग किए जाते हैं पेट्रोल और डीजल

रिफाइनरी में कच्चे तेल को एक बड़े टावर में गर्म किया जाता है जिसे डिस्टिलेशन कॉलम कहा जाता है. इस प्रक्रिया में कच्चे तेल को बहुत अधिक तापमान पर गर्म किया जाता है. गर्म होने पर तेल भाप में बदलने लगता है और अलग-अलग तापमान पर उसके अलग हिस्से अलग हो जाते हैं. हल्के पदार्थ जल्दी भाप बन जाते हैं और ऊपर की तरफ चले जाते हैं, जबकि भारी पदार्थ नीचे रह जाते हैं. इसी प्रक्रिया से अलग-अलग स्तरों पर पेट्रोल, डीजल, केरोसिन और विमान ईंधन जैसे कई उत्पाद निकलते हैं.

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पेट्रोल और डीजल में क्या फर्क होता है

हालांकि दोनों एक ही तेल से बनते हैं, लेकिन इनकी विशेषताएं अलग होती हैं. पेट्रोल हल्का और जल्दी जलने वाला ईंधन होता है. इसलिए पेट्रोल इंजन तेजी से गति पकड़ते हैं और आमतौर पर कारों और मोटरसाइकिलों में इस्तेमाल होते हैं.
डीजल पेट्रोल की तुलना में भारी होता है और इसे जलने के लिए ज्यादा दबाव और तापमान की जरूरत होती है. यही वजह है कि डीजल इंजन ज्यादा ताकत पैदा करते हैं और भारी वाहनों में उपयोग किए जाते हैं.

 माइलेज और खर्च में अंतर

डीजल इंजन आमतौर पर पेट्रोल इंजन की तुलना में ज्यादा माइलेज देते हैं. इसका कारण यह है कि डीजल में ऊर्जा घनत्व ज्यादा होता है और इंजन ज्यादा कुशल तरीके से ऊर्जा पैदा करता है. हालांकि डीजल इंजन की कीमत और रखरखाव का खर्च थोड़ा ज्यादा हो सकता है. वहीं पेट्रोल इंजन हल्के और सरल होते हैं, इसलिए उनकी सर्विसिंग अपेक्षाकृत सस्ती होती है.

पर्यावरण पर क्या पड़ता है प्रभाव

पेट्रोल और डीजल दोनों के जलने से प्रदूषण होता है, लेकिन इनके प्रभाव अलग-अलग हो सकते हैं. पेट्रोल इंजन आमतौर पर कम धुआं छोड़ते हैं, जबकि पुराने डीजल इंजन से काला धुआं ज्यादा निकलता था. हालांकि नई तकनीक जैसे बीएस-6 मानकों के आने से दोनों तरह के इंजनों को पहले से ज्यादा पर्यावरण अनुकूल बनाने की कोशिश की गई है. पेट्रोल और डीजल दोनों एक ही कच्चे तेल से बनते हैं, लेकिन उनकी विशेषताएं और उपयोग अलग होते हैं. पेट्रोल हल्का और तेज रफ्तार के लिए उपयुक्त होता है, जबकि डीजल ज्यादा ताकत और माइलेज के लिए जाना जाता है. इसलिए वाहन चुनते समय या ईंधन का चुनाव करते समय अपनी जरूरत और उपयोग को ध्यान में रखना जरूरी होता है.

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